नई दिल्ली में शिंजो आबे मार्ग के नाम से सड़क रखने की उठी मांग, शुरू हुआ खास अभियान

Kittu Kumari9 August 20262 min read31 viewsDelhi Local
नई दिल्ली में शिंजो आबे मार्ग के नाम से सड़क रखने की उठी मांग, शुरू हुआ खास अभियान

टोक्यो से मिली खबर के अनुसार, भारत-जापान संबंधों को मजबूत करने के लिए काम करने वाले संगठन 'कनेक्ट इंडिया जापान' ने एक सार्वजनिक अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत भारत सरकार से नई दिल्ली में एक सड़क का नाम जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के नाम पर रखने का आग्रह किया गया है। यह पहल दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक साझेदारी को बढ़ाने में आबे की महत्वपूर्ण भूमिका को याद करने के लिए की गई है। इस संबंध में हिन्दुस्थान समाचार से जानकारी सामने आई है।

जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने 26 सितंबर 2006 से 26 सितंबर 2007 तक और 26 दिसंबर 2012 से 16 सितंबर 2020 तक, दो बार प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने चार बार भारत की यात्रा की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके कार्यकाल में रक्षा, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण सहयोग को बढ़ावा दिया गया था, जिससे द्विपक्षीय संबंध एक विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी में बदले थे।

अभियान का उद्देश्य और विचार

'कनेक्ट इंडिया जापान' की संस्थापक और सीईओ नूपुर तिवारी के नेतृत्व में यह अभियान चलाया जा रहा है। नूपुर तिवारी ने कहा कि शिंजो आबे के नाम पर सड़क का नाम रखना भारत की राजधानी में कृतज्ञता का स्थायी प्रतीक पेश करने जैसा है। यह उनके योगदान को इतिहास की किताबों से आगे बढ़ाकर नागरिकों के दैनिक जीवन से जोड़ने का प्रयास है। दो दशकों से अधिक समय से जापान में रह रही भारतीय नागरिक नूपुर तिवारी ने इसे 'ओंगेशी' यानी दयालुता और कृतज्ञता ज्ञापित करने की जापानी अवधारणा बताया है।

भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रतीक

नूपुर तिवारी ने कहा कि भारत ने उन्हें जड़ें दीं और जापान ने पंख दिए, तथा 'कनेक्ट इंडिया जापान' की स्थापना आर्थिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक क्षेत्रों में सेतु बनाने के लिए की गई थी। यह अभियान भारत के लोगों की ओर से उस नेता के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है जो भारत की क्षमता और रणनीतिक भविष्य में विश्वास रखते थे। इस अभियान का उद्देश्य नामित सड़क को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सार्वजनिक शैक्षिक स्पर्श बिंदु बनाना है, और इसके लिए सरकारी अधिकारियों तथा नागरिक समाज दोनों को शामिल किया जा रहा है।

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