इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर भावुक हुए शशि थरूर, याद किया छात्र जीवन और इंटरव्यू का किस्सा
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की 42वीं पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया और अपने छात्र जीवन के पुराने किस्से साझा किए।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 42वीं पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। थरूर ने इस मौके पर अपने जीवन के उन पुराने पन्नों को पलटा, जब उन्होंने एक छात्र के तौर पर इंदिरा गांधी के साथ समय बिताया था। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी यादें साझा करते हुए बताया कि इंदिरा गांधी का जाना उनके लिए एक गहरा व्यक्तिगत आघात था।
शशि थरूर ने साझा किया कि उनकी इंदिरा गांधी से पहली मुलाकात 1974 में हुई थी, जब वह सेंट स्टीफंस कॉलेज के छात्र संघ के अध्यक्ष थे। इसके बाद, 1975 की शुरुआत में उन्होंने एक स्विस यूथ मैगजीन के लिए उनका इंटरव्यू लिया। थरूर यहीं नहीं रुके, उन्होंने बताया कि 1977 में चुनावी हार के बाद उन्होंने अपनी डॉक्टरेट थीसिस (foreign policy) के लिए इंदिरा गांधी का दो बार विस्तार से इंटरव्यू लिया था।
आपातकाल का विरोध, फिर भी रही गहरी संवेदना
दिलचस्प बात यह है कि थरूर ने अपनी पोस्ट में ईमानदारी से यह स्वीकार किया कि वह आपातकाल (Emergency) और इंदिरा गांधी के शासनकाल के दौरान हुई कुछ सत्तावादी कार्रवाइयों के कड़े विरोधी थे। इसके बावजूद, 1984 में उनकी हत्या की खबर ने उन्हें झकझोर कर रख दिया था। थरूर ने लिखा कि यह लोकतंत्र के लिए एक बहुत बड़ी क्षति थी कि देश के प्रधानमंत्री का राजनीतिक भाग्य मतपत्रों (ballots) के बजाय गोलियों (bullets) से तय हुआ।
इंदिरा गांधी के राजनीतिक करियर की बात करते हुए थरूर ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध को उनके जीवन का सबसे ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि उस युद्ध में इंदिरा गांधी ने नैतिक स्पष्टता के साथ काम किया, जिससे लाखों लोग आजाद हुए, दुनिया का सबसे बड़ा शरणार्थी संकट समाप्त हुआ और उपमहाद्वीप का नक्शा बदल गया।
बता दें कि भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1966 से 1977 और फिर 1980 से 1984 तक देश की कमान संभाली। 31 अक्टूबर 1984 को उनके अपने ही अंगरक्षकों ने नई दिल्ली स्थित उनके आवास पर उनकी हत्या कर दी थी।