जमानत याचिका खारिज होने के बाद शरजील इमाम और उमर खालिद पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद शरजील इमाम और उमर खालिद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। जानें क्या है पूरा मामला।

दिल्ली दंगों की साजिश मामले में जेल में बंद स्कॉलर शरजील इमाम और उमर खालिद ने एक बार फिर अपनी आजादी की उम्मीद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दोनों ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उनकी नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया था। यह कानूनी लड़ाई ऐसे समय में आ रही है जब देश में लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता जैसे मुद्दों पर बहस तेज है।
मामले की गहराई में जाएं तो शरजील इमाम ने अपनी याचिका में दलील दी है कि वह पिछले करीब छह साल और नौ महीने से जेल में हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने लंबे समय के बाद भी अभी तक ट्रायल शुरू नहीं हुआ है और न ही अभियोजन पक्ष ने किसी गवाह का परीक्षण किया है। इमाम का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 5 जनवरी 2026 को लगाई गई एक साल की पाबंदी अब खत्म होने वाली है, इसलिए उनके मामले की नए सिरे से समीक्षा की जानी चाहिए।
क्या है पूरा कानूनी विवाद?
यह पूरा मामला फरवरी 2020 में उत्तर पूर्व दिल्ली में हुए दंगों की बड़ी साजिश से जुड़ा है, जिसमें आरोपियों पर यूएपीए (UAPA) और भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इससे पहले 5 जनवरी 2026 को जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन. अंजारिया की सुप्रीम कोर्ट बेंच ने जमानत देने से इनकार कर दिया था, लेकिन यह छूट दी थी कि संरक्षित गवाहों के परीक्षण के बाद या एक साल बीत जाने पर याचिका दोबारा लगाई जा सकती है।
इसी क्रम में 30 सितंबर 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट शामिल थे, ने उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई शर्तों और न्यायिक अनुशासन का हवाला देते हुए यह फैसला सुनाया था।
इन दोनों हस्तियों की लंबी कैद अब केवल अदालती गलियारों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गई है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के छात्र संघ चुनावों के दौरान भी इनके मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया है। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं कि क्या उन्हें इस बार राहत मिलेगी या नहीं।