दिल्ली में 62वीं शंकर पेंटिंग प्रतियोगिता: हजारों बच्चों ने रंगों से भरी अपनी कल्पनाएं
दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में हजारों बच्चों ने डिजिटल डिटॉक्स अपनाते हुए अपनी कला का जादू बिखेरा।

देश की राजधानी दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को एक विशाल ओपन-एयर आर्ट स्टूडियो में तब्दील हो गया। मौका था 62वीं शंकर पेंटिंग प्रतियोगिता दिल्ली का, जहां 5 से 17 साल की उम्र के हजारों नन्हे कलाकारों ने हिस्सा लिया। चिल्ड्रन्स बुक ट्रस्ट (CBT) द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य बच्चों को स्क्रीन की दुनिया से दूर कर उन्हें अपनी रचनात्मकता दिखाने का मौका देना था।
इस प्रतियोगिता की सबसे खास बात यह थी कि बच्चों को 'डिजिटल डिटॉक्स' के लिए प्रेरित किया गया। प्रतिभागियों को कोई पहले से तय विषय नहीं दिया गया था, बल्कि थीम का खुलासा मौके पर ही किया गया। सुबह 10 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक चले इस इवेंट में बच्चों को बिना किसी रिहर्सल के अपनी कल्पना को कागज पर उतारना था। प्रतियोगिता को तीन आयु वर्गों (5-8, 9-12 और 13-17 वर्ष) में बांटा गया था।
सख्ती से लागू रहे नियम और रचनात्मकता का संगम
प्रतियोगिता के दौरान अनुशासन का पूरा ध्यान रखा गया। बच्चों को अपनी ड्राइंग सामग्री खुद लानी थी, जबकि आयु वर्ग के अनुसार कागज आयोजकों द्वारा दिए गए थे। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि माता-पिता और शिक्षकों के लिए एक अलग निर्धारित क्षेत्र बनाया गया था। किसी भी वयस्क की अनधिकृत एंट्री पर बच्चे को प्रतियोगिता से बाहर करने का कड़ा नियम था, ताकि बच्चों की मौलिकता बनी रहे।
CBT की पब्लिकेशंस एडिटर श्रीमती नवीन मेनन ने इस मौके पर कहा कि यह आयोजन इस बात का सबूत है कि अगर बच्चों के हाथ में ब्रश और कागज थमा दिया जाए, तो वे कितनी आसानी से डिजिटल स्क्रीन को भूल सकते हैं। वहीं, CBT ट्रस्टी श्री रोबिंदर सचदेव ने कहा कि आज के डिजिटल युग में भी इस तरह की परंपराओं की प्रासंगिकता बनी हुई है, जो बच्चों की ऊर्जा और उत्साह से साफ झलकती है।
बता दें कि यह पहल 1952 से चली आ रही है और रजिस्ट्रेशन पूरी तरह मुफ्त रखा गया था। विजेताओं के लिए शंकर मेमोरियल गोल्ड मेडल, चिल्ड्रन्स बुक ट्रस्ट गोल्ड मेडल और चिल्ड्रन्स वर्ल्ड गोल्ड मेडल जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार रखे गए हैं, साथ ही कई बच्चों को मेरिट सर्टिफिकेट भी दिए जाएंगे।