दिल्ली के Shangri-La होटल में महिला को वॉशरूम इस्तेमाल करने से रोका, सोशल मीडिया पर मचा बवाल

देश की राजधानी दिल्ली के एक आलीशान फाइव स्टार होटल, Shangri-La Hotel में एक महिला के साथ हुए व्यवहार ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। मामला तब गरमाया जब एक महिला ने वीडियो साझा कर आरोप लगाया कि होटल स्टाफ ने उसे वॉशरूम इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी। महिला का दावा है कि वह एक इमरजेंसी स्थिति में थी, लेकिन केवल इसलिए उसे मना कर दिया गया क्योंकि वह होटल की रजिस्टर्ड गेस्ट नहीं थी।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो में महिला होटल के रिसेप्शन एरिया की ओर इशारा करते हुए अपनी आपबीती सुना रही है। इस घटना के बाद नेटिज़न्स दो गुटों में बंट गए हैं। एक बड़ा वर्ग इसे मानवता के खिलाफ और होटल की खराब मेहमाननवाजी बता रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे निजी संपत्ति और सुरक्षा के नियमों से जोड़कर देख रहा है।
कानूनी दांव-पेच और सराइज एक्ट की चर्चा
इस विवाद के बाद अब लोग पुराने कानूनों का हवाला दे रहे हैं। कई सोशल मीडिया यूजर्स का तर्क है कि 'इंडियन सराइज एक्ट 1867' (Indian Sarais Act, 1867) के तहत होटलों और सरायों के लिए जनता को पीने का पानी और वॉशरूम जैसी बुनियादी सुविधाएं देना अनिवार्य है। कुछ लोगों का तो यहां तक दावा है कि ऐसी मनाही होने पर होटल का लाइसेंस तक रद्द हो सकता है।
हालांकि, कानूनी जानकारों की राय अलग है। उनका कहना है कि सराइज एक्ट अब काफी पुराना हो चुका है और लॉ कमीशन ऑफ इंडिया ने पहले ही इसे खत्म करने की सिफारिश की है। विशेषज्ञों के मुताबिक, फाइव स्टार होटल निजी संस्थान होते हैं और उन्हें अपनी सुरक्षा और प्राइवेसी के लिए एंट्री रेगुलेट करने का पूरा हक है।
इस बीच, साल 2017 के एक पुराने निर्देश का भी जिक्र हो रहा है, जिसमें तत्कालीन दक्षिण दिल्ली नगर निगम ने होटलों और रेस्टोरेंट्स को निर्देश दिया था कि वे मामूली शुल्क (अधिकतम 5 रुपये) लेकर जनता को शौचालय का उपयोग करने दें। फिलहाल, इस पूरे मामले पर Shangri-La होटल की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है और न ही किसी कानूनी शिकायत की खबर है, लेकिन इंटरनेट पर यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है।