भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2026: SGS ने पेश किए चावल परीक्षण के आधुनिक समाधान
दिल्ली के भारत मंडपम में SGS ने चावल की गुणवत्ता और कीटनाशक जांच के लिए आधुनिक तकनीक पेश की, ताकि निर्यात में रिजेक्शन कम हो।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक आयोजित 'भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2026' में टेस्टिंग, इंस्पेक्शन और सर्टिफिकेशन कंपनी SGS ने चावल विश्लेषण की अपनी उन्नत क्षमताओं का प्रदर्शन किया। कंपनी ने यहां एक खास 'एक्सपीरियंस जोन' बनाया है, जहां यह दिखाया जा रहा है कि चावल में मौजूद दूषित पदार्थों और खामियों, जैसे कि एफ्लाटॉक्सिन (aflatoxins) की पहचान कैसे की जाती है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के पालन में ये जांचें अब बेहद महत्वपूर्ण हो गई हैं।
SGS इंडिया के डिजिटल सेंसरी और एडवांस्ड सेंटर फॉर टेस्टिंग की प्रमुख अश्वती वी. कृष्णन ने बताया कि कंपनी अब कीटनाशक अवशेष विश्लेषण (pesticide residue analysis) की सुविधा दे रही है, जिसका टर्नअराउंड समय मात्र 24 से 72 घंटे है। इतनी तेजी से जांच होने से निर्यातकों और खरीदारों को शिपमेंट से पहले खेप की गुणवत्ता परखने और अंतरराष्ट्रीय नियमों को पूरा करने में बड़ी मदद मिलेगी। इसके लिए कंपनी LC-MS/MS तकनीक का इस्तेमाल कर रही है, जिससे एक ही विश्लेषण में लगभग 750 अणुओं (molecules) की जांच संभव है।
निर्यात में रिजेक्शन रोकने पर जोर
कॉन्फ्रेंस के दौरान सामने आए आंकड़े चौंकाने वाले हैं। चर्चा हुई कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान यूरोपीय बाजारों में भारतीय चावल के शिपमेंट रिजेक्ट होने का मुख्य कारण 69% कीटनाशक अवशेष और 23% एफ्लाटॉक्सिन रहे। SGS इंडिया की फूड टेस्टिंग सर्विसेज हेड पूरवी शाह ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम केवल समस्या आने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय 'प्रोएक्टिव टेस्टिंग' अपनाएं, ताकि पूरी सप्लाई चेन में सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
वहीं, SGS इंडिया के नेशनल हेड ऑफ सेल्स एंड मार्केटिंग संदीप पाटनकर ने क्यूआर-कोड आधारित ट्रेसेबिलिटी (traceability) के कार्यान्वयन पर जोर दिया। इससे खेप को ट्रैक करना आसान होगा और यह पता लगाया जा सकेगा कि गुणवत्ता में कमी वास्तव में कहां से शुरू हुई। इस इवेंट में AHK ग्रुप के मिर्जा आलम, EAS के आनंद शर्मा, यूरोफिन्स एनालिटिकल सर्विसेज इंडिया के डॉ. पंकज जैमिनी और VI एक्सपोर्ट्स की ईशा गर्ग जैसे विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया और खेत स्तर पर कीटनाशकों के बेहतर प्रबंधन पर चर्चा की।