1 करोड़ की रिश्वत मामला: SFIO डिप्टी डायरेक्टर हरीश तन्वर कोर्ट ने भेजे न्यायिक हिरासत में

Kittu Kumari19 October 20262 min read0 viewsNational
1 करोड़ की रिश्वत मामला: SFIO डिप्टी डायरेक्टर हरीश तन्वर कोर्ट ने भेजे न्यायिक हिरासत में

भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में सीबीआई की गिरफ्त में आए गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) के डिप्टी डायरेक्टर हरीश तन्वर को राउज एवेन्यू कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। तन्वर पर एक शिकायतकर्ता से करोड़ों रुपये की रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप है। ड्यूटी स्पेशल जज (CBI) सत्यव्रत पांडा ने आरोपी को 28 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में रखने का आदेश दिया है।

हरीश तन्वर को सीबीआई ने 14 अक्टूबर को चेन्नई से गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया। कोर्ट में पेशी के बाद उन्हें पहले तीन दिनों के लिए सीबीआई की हिरासत में भेजा गया था, जहां उनसे गहन पूछताछ की गई। अब जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि जांच अभी जारी है, इसलिए आरोपी को जेल भेजा जाना जरूरी है। इस मामले में दो अन्य आरोपी, भारत शर्मा और आर्यन शर्मा, पहले से ही 28 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में हैं।

DHFL घोटाले की जांच में मांगी थी भारी रिश्वत

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सीबीआई के मुताबिक, यह पूरा मामला DHFL घोटाले से जुड़ी एक जांच से संबंधित है। आरोप है कि चेन्नई में जांच अधिकारी के तौर पर तैनात हरीश तन्वर ने शिकायतकर्ता गोपाल शिवराम डेलवी से अपनी मदद के बदले शुरू में 10 करोड़ रुपये की मांग की थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसे लगातार कई लोगों द्वारा संपर्क किया गया और SFIO के नोटिस के जरिए उसे डराया-धमकाया गया ताकि वह रिश्वत की मांगों को मान ले।

जांच में यह बात सामने आई कि इस खेल में केवल तन्वर ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य लोग और एक वकील भी शामिल थे। बाद में बातचीत के जरिए इस रकम को घटाकर 1 करोड़ रुपये कर दिया गया, जिसमें से 25 लाख रुपये टोकन अमाउंट के तौर पर मांगे गए थे। सीबीआई ने जाल बिछाकर छापेमारी की, जिसमें दो गवाहों की मौजूदगी में भारत शर्मा को 20 लाख रुपये दिए गए, जिसे उसकी ओर से आर्यन शर्मा ने प्राप्त किया।

सीबीआई ने कोर्ट में दलील दी कि इस साजिश के पीछे और कौन-कौन से सरकारी कर्मचारी या बाहरी लोग शामिल हैं, इसका पता लगाने के लिए विस्तृत जांच जरूरी है। वहीं, बचाव पक्ष के वकील ने इन आरोपों का विरोध करते हुए दावा किया कि सीबीआई ने इस मामले को गढ़ा है और आरोपी आर्यन शर्मा महज एक 19 साल का छात्र है, जिसका इस अपराध से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने सबूतों और जांच की स्थिति को देखते हुए आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने का फैसला किया।

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