नई दिल्ली में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी SFI ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट को स्थायी रूप से बंद किए जाने के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। यह मामला गुरुवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है जिस पर जस्टिस अमित महाजन सुनवाई करेंगे। एसएफआई ने केंद्र सरकार की शिकायत अपीलीय समिति यानी GAC और मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक के खिलाफ यह याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उनके इंस्टाग्राम अकाउंट को ब्लॉक करने के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर आईटी नियम, 2021 के तहत तय समयसीमा के बाद भी कोई फैसला नहीं लिया गया है।
याचिका के मुताबिक इंस्टाग्राम ने 5 जुलाई को एसएफआई दिल्ली के अकाउंट @SfiDelhi को यह कहते हुए स्थायी रूप से बंद कर दिया था कि यह किसी अन्य अकाउंट से जुड़ा हो सकता है जो नियमों के खिलाफ गया है।
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इंस्टाग्राम ने उस कथित जुड़े हुए अकाउंट की पहचान नहीं बताई और न ही किसी विशेष उल्लंघन की जानकारी दी। साल 2018 में बनाए गए इस अकाउंट पर करीब 13,000 फॉलोअर्स थे और इसका उपयोग छात्र गतिविधियों और अभियानों के संचार के लिए किया जाता था। एसएफआई ने 7 जुलाई को इस कार्रवाई के खिलाफ अपील की थी और 9 जुलाई को मेटा के शिकायत अधिकारी से संपर्क किया था।
कोई जवाब न मिलने पर एसएफआई ने 12 अगस्त को जीएसी के समक्ष अपील दायर की थी।
याचिका में दावा किया गया है कि 16 सितंबर तक जीएसी की वेबसाइट पर अपील को 'प्रक्रियाधीन' दिखाया जाता रहा जबकि 30 दिन से अधिक का समय बीत चुका था। यह याचिका आईटी नियम, 2021 के नियम 3ए(4) पर आधारित है जिसके तहत जीएसी को अपील प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर उसका तेजी से निपटारा करने का प्रयास करना होता है। एसएफआई ने जीएसी को निर्धारित समय के भीतर अपनी अपील पर फैसला करने का निर्देश देने की मांग की है।
याचिका में अकाउंट बंद करने की प्रक्रिया और अपीलीय उपाय में देरी पर भी सवाल उठाया गया है।
एसएफआई का आरोप है कि बिना किसी ठोस कारण बताए और बिना अपनी बात रखने का मौका दिए उनका अकाउंट स्थायी रूप से बंद कर दिया गया। इस कार्रवाई के कारण संगठन के सभी फॉलोअर्स, एंगेजमेंट और पुराना डेटा खत्म हो गया जिससे छात्रों के साथ संवाद करने का उनका स्थापित मंच प्रभावित हुआ है। एसएफआई ने मुख्य रूप से वैधानिक प्रक्रिया में देरी के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है ताकि नियमों के तहत समय पर उनकी अपील पर निर्णय लिया जा सके।