जंतर मंतर को फिर से विरोध स्थल बनाने की मांग, SFI और DYFI ने निकाला मार्च

देश की राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के पारंपरिक केंद्र जंतर मंतर को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) ने एक संयुक्त मार्च निकालकर जंतर मंतर को फिर से विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में बहाल करने की मांग की है। यह मार्च फिरोज शाह रोड से शुरू होकर जंतर मंतर तक पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई।
दरअसल, दिल्ली पुलिस ने हाल ही में जंतर मंतर को विरोध प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थल की सूची से हटा दिया है। गृह मंत्रालय द्वारा गठित एक समिति की सिफारिशों के बाद यह फैसला लिया गया। अब दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों के लिए तीन नए स्थानों—रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को निर्धारित किया है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के मुताबिक, इन नए स्थलों पर प्रदर्शनों के आयोजन के लिए जल्द ही एक संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की जाएगी।
विरोध और गिरफ्तारियों का सिलसिला
जंतर मंतर के डी-नोटिफिकेशन के बाद माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि इन कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों को उकसाने और शांति भंग करने की कोशिश की। इनमें से दो कार्यकर्ताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, जबकि एक को छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए पाबंद किया गया है।
पुलिस के मुताबिक, 13 अक्टूबर की सुबह CJP के सदस्य निजी परिसर के रास्ते डी-नोटिफाइड जंतर मंतर स्थल में घुसने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई और उन्होंने सरकारी काम में बाधा डाली। दूसरी ओर, CJP ने स्पष्ट किया है कि वे चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर अड़े रहेंगे और जंतर मंतर जैसे ऐतिहासिक विरोध स्थल को हटाने के फैसले को चुनौती देते रहेंगे।
इसी बीच, विपक्षी INDIA गठबंधन के नेताओं और सांसदों ने भी कनॉट प्लेस से एक बड़ा मार्च निकाला। यह प्रदर्शन चुनाव आयोग द्वारा लोकतांत्रिक संस्थाओं के कथित तौर पर कमजोर किए जाने और चुनावी हेरफेर के आरोपों को लेकर था, जिससे राजधानी में राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।