स्टारलिंक लाइसेंस विवाद: ज्योतिरादित्य सिंधिया का राहुल गांधी पर हमला, बोले- 'कांग्रेस को खुद नहीं पता कि वे किधर जा रहे हैं'

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्टारलिंक (Starlink) को भारत में काम करने के लाइसेंस मिलने के मुद्दे पर राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला है। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026' के 10वें संस्करण के दौरान सिंधिया ने कहा कि सरकार की नीतियां पूरी तरह स्पष्ट हैं और इस मामले में कांग्रेस की स्थिति बेहद भ्रमित करने वाली है।
सिंधिया ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि कांग्रेस पार्टी वास्तव में क्या चाहती है और वे किस दिशा में जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले कांग्रेस को एक खास व्यक्ति को लाइसेंस मिलने पर आपत्ति थी, लेकिन अब वे उसी व्यक्ति के साथ खड़े होकर सवाल कर रहे हैं कि उसे लाइसेंस क्यों नहीं मिला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "मुझे नहीं पता कि उन्हें स्पष्टता है या नहीं कि वे कहां जा रहे हैं, लेकिन कांग्रेस से यही उम्मीद की जा सकती है।"
लाइसेंस और स्पेक्ट्रम की स्थिति स्पष्ट: सिंधिया
लाइसेंस प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण देते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार ने तीन कंपनियों को लाइसेंस दिए हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही राजस्व साझाकरण (revenue-sharing) के आधार पर शुल्क प्रणाली का ढांचा तय हो जाएगा, कंपनियों को स्पेक्ट्रम आवंटित कर दिया जाएगा। सिंधिया ने यह भी साफ किया कि जो कंपनियां व्यक्तिगत रूप से सुरक्षा शर्तों को पूरा कर लेंगी, वे अपना परिचालन शुरू कर सकेंगी।
यह पूरा विवाद तब गहराया जब SpaceX के सीईओ एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक के प्रवेश की कोशिशों को "परेशान करने वाला" बताया। मस्क का दावा था कि पांच साल तक नियमों का पालन करने के बावजूद उन्हें लाइसेंस नहीं मिला। इस पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मस्क का स्वागत करते हुए एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी की थी, जिस पर मस्क ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे वाकई चिंताजनक बताया।
वहीं, कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि उनके शब्दों में गहरा कटाक्ष था। चिदंबरम के अनुसार, राहुल गांधी यह संकेत दे रहे थे कि केंद्र सरकार किस तरह कुछ खास कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाकर एकाधिकार (monopoly) को बढ़ावा दे रही है।