राहुल गांधी के खिलाफ SCBA में निंदा प्रस्ताव की मांग, वकीलों ने जताया कड़ा विरोध

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के करीब 190 सदस्यों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ एक औपचारिक पत्र लिखकर निंदा प्रस्ताव लाने की मांग की है। यह विवाद 12 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए एक मार्च के बाद शुरू हुआ है। वकीलों का आरोप है कि इस मार्च के जरिए न्यायपालिका पर अनुचित राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की गई है।
दरअसल, यह विरोध प्रदर्शन मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर था, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी। प्रदर्शनकारी वकीलों ने न केवल इस मार्च पर आपत्ति जताई, बल्कि राहुल गांधी और उनके साथियों द्वारा दायर एक याचिका की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने उनकी याचिका में 14 खामियां पाई हैं, जिनमें वकालतनामा न होना, पहचान प्रमाण की समस्या और निजी प्रतिवादियों की गलत लिस्टिंग जैसे मुद्दे शामिल हैं।
न्यायपालिका की गरिमा और कानूनी विवाद
तनाव तब और बढ़ गया जब 13 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी और CPI(M) सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने 10 अक्टूबर के प्रदर्शनों के दौरान लगाए गए सुरक्षा प्रतिबंधों के खिलाफ हस्तक्षेप आवेदन दायर किया। इसके अगले ही दिन, 14 अक्टूबर को राहुल गांधी, कांग्रेस नेतृत्व और अखिलेश यादव के खिलाफ एक आपराधिक अवमानना याचिका दायर की गई। यह याचिका मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों को लेकर दाखिल की गई है।
SCBA के अध्यक्ष प्रदीप कुमार राय ने पहले ही 12 अक्टूबर को एक प्रस्ताव पारित कर सोशल मीडिया पर CJI सूर्यकांत के इस्तीफे की मांग करने वालों की निंदा की थी और इसे न्यायिक गरिमा को कम करने वाला प्रयास बताया था। इससे पहले, SCBA के पूर्व अध्यक्ष आदिश सी. अग्रवाल ने भी राहुल गांधी से इस विरोध प्रदर्शन को रद्द करने का आग्रह किया था, ताकि न्याय प्रशासन में कोई बाधा न आए।
मामला तब और गरमा गया जब 13 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने चुनाव आयोग की स्थिति और स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया पर चर्चा करने के लिए विपक्षी नेताओं की मुलाकात की मांग को खारिज कर दिया।