बड़ी खबर: सुप्रीम कोर्ट का फैसला, गुरुग्राम में 274 एकड़ जमीन MCG को मिली

Kittu Kumari5 August 20262 min read79 viewsNCR
बड़ी खबर: सुप्रीम कोर्ट का फैसला, गुरुग्राम में 274 एकड़ जमीन MCG को मिली

सोमवार, 4 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम के हैदरपुर में 274 एकड़ (436 बीघा और 18 बिस्वा) से अधिक विवादित जमीन का मालिकाना हक Municipal Corporation Gurugram (MCG) को वापस दे दिया है। इस महत्वपूर्ण फैसले ने पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के साल 2007 के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें जमीन पर निजी मालिकाना हक के दावों को मान्यता दी गई थी। ANI News के अनुसार, शीर्ष अदालत ने माना है कि यह जमीन 'शामलात देह' (गाँव की साझा जमीन) है और इसे प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं माना जा सकता।

  • सुप्रीम कोर्ट ने 274 एकड़ जमीन का अधिकार MCG को सौंपा।
  • साल 2007 का पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट का फैसला रद्द हुआ।
  • जमीन को 'शामलात देह' (गाँव की साझा जमीन) घोषित किया गया।
  • MCG वजीराबाद और बाजघेरा में अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई करेगा।
  • जस्टिस संजय कुमार और के. विनोद चंद्रन का फैसला

    85-पन्नों के इस फैसले को जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने सुनाया। अदालत ने पुष्टि की कि यह विवादित जमीन हरियाणा कॉमन लैंड्स (रेगुलेशन) एक्ट, 1961 के तहत आती है। अदालत ने फैसला सुनाया कि केवल रेवेन्यू रिकॉर्ड में गाँव के मालिकों के नाम दर्ज होने से प्राइवेट ओनरशिप साबित नहीं हो सकती, खासकर तब जब 26 जनवरी 1950 से पहले कोई वैध विभाजन नहीं हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने 13 सितंबर 1955 के एक म्यूटेशन को बरकरार रखा, जो उस समय की ग्राम पंचायत, वजीराबाद के पक्ष में था। इस जमीन को लेकर litigation साल 1985 में शुरू हुई थी और जब साल 2010 में MCG का गठन हुआ, तब ग्राम पंचायत के अधिकार कॉर्पोरेशन को ट्रांसफर कर दिए गए थे।

    MCG कमिश्नर और मेयर का बयान

    गुरुग्राम की मेयर राज रानी मल्होत्रा ने इस फैसले को भूमि अतिक्रमण के खिलाफ एक बड़ी जीत बताया। उन्होंने घोषणा की कि MCG जल्द ही वजीराबाद में 274 एकड़ जमीन से अवैध निर्माण हटाने के लिए डिमोलिशन ड्राइव शुरू करेगा। उन्होंने आगे कहा कि MCG का अगला उद्देश्य बाजघेरा में 272 एकड़ अन्य विवादित जमीन को अतिक्रमण से सुरक्षित करना है। MCG कमिश्नर प्रदीप दहिया ने पुष्टि की कि कॉर्पोरेशन जमीन का कब्जा लेगा और पब्लिक पर्पस के लिए इसके इस्तेमाल की योजना बनाने से पहले क्षेत्र की सीमा तय करने के लिए ड्रोन सर्वे करेगा।

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