सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा डीएम की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा, एनएसए हिरासत और 5 लाख रुपये जुर्माने का मामला

Kittu Kumari23 September 20262 min read0 viewsNCR
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा डीएम की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा, एनएसए हिरासत और 5 लाख रुपये जुर्माने का मामला

सुप्रीम कोर्ट में नोएडा डीएम की याचिका पर सुनवाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को गौतम बुद्ध नगर की जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) मेधा रूपम की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ है, जिसमें छात्रा कार्यकर्ता आकृति चौधरी की एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत हिरासत को रद्द कर दिया गया था और डीएम के वेतन से पांच लाख रुपये काटकर मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने हिरासत की कार्रवाई को लेकर डीएम के खिलाफ सख्त टिप्पणियां भी की थीं। न्यायमूर्ति एससी शर्मा और न्यायमूर्ति एनके सिंह की पीठ ने इस बात पर दलीलें सुनीं कि क्या डीएम को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जबकि हिरासत का प्रस्ताव प्रशासन के कई स्तरों से गुजरा था।

वकीलों की दलीलें और बहुस्तरीय प्रक्रिया

DelhiBreakings की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और डीएम की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि डीएम ने उस सामग्री के आधार पर काम किया जो एसएचओ, डीसीपी और कमिश्नर के पास से गुजरने के बाद उनके सामने रखी गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि इसके बाद एनएसए सलाहकार बोर्ड ने भी हिरासत की जांच की थी। कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि हम उन्हें अलग नहीं कर सकते, क्योंकि पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। रोहतगी ने तर्क दिया कि हिरासत हिंसक श्रम आंदोलन के आरोपों के बाद हुई थी और मोबाइल फोन से बरामद सामग्री का हवाला दिया, जिसमें व्हाट्सएप चैट भी शामिल थी।

आकृति चौधरी का पक्ष और अदालत के सवाल

आकृति चौधरी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्वेस ने राज्य के मामले का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि हि हिरासत के आधार यह स्थापित नहीं करते कि चौधरी ने सार्वजनिक व्यवस्था के कथित व्यवधान में वास्तव में कैसे योगदान दिया था। उन्होंने अधिकारियों द्वारा भरोसा की गई सामग्री पर सवाल उठाया और कहा कि राज्य ऐसा पर्याप्त साक्ष्य नहीं दिखा सका जो उन्हें कथित हिंसा से जोड़े। पीठ ने हिरासत का समर्थन करने वाली सामग्री पर भी सवाल उठाया और पूछा कि क्या हमारे पास उस पर कोई खुफिया रिपोर्ट हो सकती है? सॉलिसिटर जनरल ने आग्रह किया कि पीठ रूपम के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणियों और पांच लाख रुपये की कटौती के निर्देश को हटा दे।

Share:

Comments

Leave a comment