दिल्ली में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, नियमों की सख्ती के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में पटाखों पर पूरी तरह बैन लगाने से मना किया है, लेकिन नियमों के सख्त पालन और निगरानी के आदेश दिए हैं।

देश की सबसे बड़ी अदालत ने दिल्ली में पटाखों पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने के विचार को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि शहर में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए केवल पूर्ण प्रतिबंध लगाना कोई व्यावहारिक समाधान नहीं है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने स्पष्ट किया कि त्योहारों के दौरान लोगों में उत्साह होता है, लेकिन प्रशासन को केवल आदेश जारी करने के बजाय उन्हें जमीन पर लागू करने पर जोर देना चाहिए।
अदालत ने दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियमों का पालन न होने की वजह से सरकारी आदेशों का मजाक बन रहा है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि सरकार को केवल पाबंदियों के भरोसे नहीं रहना चाहिए, बल्कि विराट कोहली जैसी मशहूर हस्तियों के जरिए जन-जागरूकता अभियान चलाना चाहिए, ताकि लोग खुद ही पटाखों का सीमित उपयोग करें।
ग्रीन पटाखों और निगरानी पर जोर
सुनवाई के दौरान 'नेक्स्ट जनरेशन' ग्रीन पटाखों में बेरियम के इस्तेमाल को लेकर तकनीकी चर्चा हुई। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि इस मुद्दे पर आंतरिक विचार-विमर्श चल रहा है और अंतिम नीति तय करने के लिए तीन हफ्ते का समय मांगा गया है। वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को सीएसआईआर-नीरी (CSIR-NEERI) द्वारा विकसित बेरियम-आधारित फॉर्मूलेशन की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि जब तक वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिलते कि प्रदूषण न्यूनतम स्तर पर है, तब तक पिछली पाबंदियों में ढील नहीं दी जाएगी। कोर्ट का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सर्दियों के मौसम में जहरीली हवा से बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों की सेहत पर बुरा असर न पड़े, इसलिए अब नियमों की निगरानी और सख्त की जाएगी।