CEC ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब

Kittu Kumari5 October 20262 min read0 viewsNational
CEC ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की एक याचिका पर एकतरफा अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। यह याचिका इस आरोप के आधार पर दायर की गई थी कि मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले एकतरफा तरीके से लिए गए। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी बड़े फैसले से पहले चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों की बात सुनना जरूरी है।

चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने इस मामले में केंद्र सरकार, भारत निर्वाचन आयोग (ECI), मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू, विवेक जोशी, डिप्टी चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और डीजी (आईटी) सीमा खन्ना को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि पहले प्रामाणिक जानकारी जुटाई जाए, यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो किसी भी फैसले को रद्द किया जा सकता है।

क्या हैं याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप?

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याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने तर्क दिया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने आयोग के अन्य दो सदस्यों की आपत्तियों के बावजूद 14 महत्वपूर्ण फैसले अकेले ले लिए। याचिका में दावा किया गया कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरा है। अधिवक्ता ने कहा कि कानून के मुताबिक चुनाव आयोग के फैसले सर्वसम्मति से या बहुमत के आधार पर होने चाहिए, न कि किसी एक व्यक्ति की मर्जी से।

जब याचिकाकर्ता ने CEC को तुरंत निलंबित करने की मांग की, तो बेंच ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर ऐसा हुआ तो चुनाव कौन कराएगा? कोर्ट ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के निलंबन से पूरी चुनावी प्रक्रिया ठप हो सकती है। जस्टिस बागची ने यह भी सवाल उठाया कि बिना चुनाव आयोग की बात सुने ऐसी राहत कैसे दी जा सकती है। कोर्ट ने साफ किया कि वह केवल अखबार की खबरों के आधार पर कोई आदेश पारित नहीं करेगा।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कई आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इनमें फॉर्म 6 में बदलाव, मीटिंग के मिनट्स साझा न करना और चुनावी डेटाबेस तक पहुंच को नियंत्रित करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। याचिका का मुख्य जोर इस बात पर है कि अनुच्छेद 324 के तहत मिली शक्तियां सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के माध्यम से इस्तेमाल की जानी चाहिए, न कि व्यक्तिगत तौर पर।

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