ACP पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली पत्रकार को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

Kittu Kumari15 October 20262 min read0 viewsNational
ACP पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली पत्रकार को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

देश की सर्वोच्च अदालत ने एक मामले में अहम हस्तक्षेप करते हुए एक महिला पत्रकार को दिल्ली पुलिस की किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब एक महिला पत्रकार ने दिल्ली पुलिस के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) विवेक भगत पर यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि पत्रकार के खिलाफ कोई भी कठोर कदम नहीं उठाया जाएगा।

यह मामला 3 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे एक विरोध प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ था। पत्रकार, जिन्हें 'रोजी' के नाम से जाना जा रहा है, ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान ACP विवेक भगत ने उनके साथ यौन उत्पीड़न किया। हालांकि, इसके बाद कहानी में नया मोड़ आया जब ACP भगत ने खुद को अनुसूचित जाति (SC) समुदाय का बताते हुए 13 अक्टूबर को पत्रकार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकार ने उनकी ड्यूटी में बाधा डाली और उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया।

बदले की भावना से दर्ज कराया गया केस: इंदिरा जयसिंग

इस मामले में पत्रकार की पैरवी कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंग ने अदालत में दलील दी कि पत्रकार के खिलाफ दर्ज की गई FIR वास्तव में एक 'काउंटरब्लास्ट' है। उन्होंने कहा कि जब महिला पत्रकार ने यौन उत्पीड़न की शिकायत की, तो उसे दबाने और डराने के लिए जानबूझकर जातिगत भेदभाव का मामला दर्ज कराया गया। दूसरी ओर, केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सभी पत्रकारों को एक साथ सुरक्षा देने का विरोध किया और अदालत में पेश किए गए वीडियो सबूतों की सत्यता पर सवाल उठाए।

कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए संकेत दिया है कि वह एक स्वतंत्र समिति का गठन कर सकता है। इस समिति में पूर्व महिला न्यायाधीश और IPS अधिकारी शामिल हो सकते हैं, जो इस तरह के संवेदनशील मामलों की जांच करेंगे। गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच पत्रकार की शिकायत की जांच तो कर रही है, लेकिन अब तक उनके पक्ष में कोई औपचारिक FIR दर्ज नहीं की गई है। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

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