सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: दिल्ली मेट्रो और इंटरनेट सेवाएं तुरंत बहाल करें, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को न करें डिटेन

देश की राजधानी में जारी तनाव के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप करते हुए अधिकारियों को दिल्ली मेट्रो और रेलवे सेवाओं को तुरंत बहाल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे लोगों को अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए। जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने यह अंतरिम आदेश उन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया, जिनमें पुलिस द्वारा की गई कथित ज्यादतियों का मुद्दा उठाया गया था।
यह पूरा मामला 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किए जा रहे प्रदर्शनों से जुड़ा है। CJP का आरोप है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision) में बड़ी अनियमितताएं हुई हैं। पार्टी की मांग है कि चुनाव आयुक्त अपने पद से इस्तीफा दें और मतदाता सूचियों को जनवरी 2025 की स्थिति में वापस लाया जाए। विपक्षी दलों ने भी इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं और अनुमान लगाया है कि विभिन्न राज्यों में ड्राफ्ट रोल से करीब 13 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं।
सुरक्षा बलों और प्रशासन के लिए सख्त गाइडलाइन्स
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और सुरक्षा बलों के लिए कुछ कड़े निर्देश जारी किए हैं, ताकि नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन न हो। कोर्ट के आदेशों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अवैध रूप से हिरासत में न लिया जाए, खासकर उन क्षेत्रों में जहां धारा 163 BNSS के प्रतिबंध लागू नहीं हैं।
- मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से संचालित करना होगा, जब तक कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कोई ठोस कारण न हो।
- इंटरनेट सेवाओं में कोई बाधा नहीं डाली जाएगी, हालांकि आईटी एक्ट के तहत प्रशासन की मौजूदा शक्तियां बरकरार रहेंगी।
- लोगों की आवाजाही को ट्रैफिक नियमों के अधीन खुला रखा जाए और वर्तमान में लगाए गए बैरिकेड्स की तुरंत समीक्षा की जाए।
- सुप्रीम कोर्ट के आसपास से धारा 163 के प्रतिबंध हटाए जाएं ताकि आम नागरिकों और वकीलों को न्याय तक पहुंचने में कोई बाधा न हो।
गौरतलब है कि 10 अक्टूबर को सुरक्षा के लिए करीब 41,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे, जिसके बाद हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें छात्र, पत्रकार, राजनीतिक नेता और CJP के प्रमुख नेता अभिजीत डिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका भी शामिल थे, जिन्हें एयरपोर्ट पहुंचते ही पकड़ लिया गया था। हालांकि, रविवार सुबह मजिस्ट्रेट ने इन नेताओं को 50,000 रुपये के मुचलके पर इस शर्त के साथ रिहा कर दिया कि वे एक साल तक शांति बनाए रखेंगे।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि रविवार को हुई इस विशेष सुनवाई यह दर्शाती है कि अदालत अनुच्छेद 19 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों की रक्षा को लेकर कितनी गंभीर है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और यह साफ किया है कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने चाहिए, लेकिन अधिकारों का हनन स्वीकार्य नहीं है।