दिल्ली विरोध प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश, एक महीने में सौंपें जांच रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाई-पावर्ड कमेटी को एक महीने के भीतर दिल्ली विरोध प्रदर्शनों में पुलिस excesses की जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

Kittu Kumari5 November 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली विरोध प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश, एक महीने में सौंपें जांच रिपोर्ट

जुलाई 2026 में दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा कथित तौर पर की गई ज्यादतियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) को निर्देश दिया है कि वह अपनी शुरुआती फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट एक महीने के भीतर जमा करे। जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की बेंच ने साफ किया कि कमेटी केवल शिकायतों के इंतजार में अपनी कार्यवाही को अनिश्चित काल के लिए नहीं टाल सकती।

अदालत ने स्पष्ट किया कि कमेटी को वर्तमान में उपलब्ध सामग्रियों और सबूतों के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए। पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली इस समिति को संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगने और विशेष रूप से बेंच द्वारा चिन्हित दो प्राथमिकता वाले मुद्दों पर अंतरिम रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है।

शिकायतों के इंतजार में न रहे कमेटी, सबूतों की जांच करें

DelhiBreakings की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट पर टिप्पणी की, जिसमें यह बताया गया था कि पोर्टल के जरिए बहुत कम शिकायतें मिली हैं। कोर्ट ने कमेटी को निर्देश दिया कि वह केवल पोर्टल की शिकायतों पर निर्भर न रहे, बल्कि वकीलों या आम जनता द्वारा पीड़ितों की ओर से पेश किए गए वीडियो, हलफनामों और याचिकाओं जैसे सबूतों की गहन जांच करे, भले ही पीड़ित खुद पैनल के पास न आए हों।

बता दें कि इस समिति का गठन 18 अगस्त 2026 को जंतर मंतर और अन्य स्थानों पर कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी हिंसा की जांच के लिए किया गया था। इस पैनल में पूर्व जस्टिस रवि शंकर झा, जस्टिस शालिंदर कौर, पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और सेवानिवृत्त मेघालय डीजीपी एल.आर. बिश्नोई जैसे दिग्गज शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जब तक गोपनीयता की कोई बेहद जरूरी परिस्थिति न हो, तब तक फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट की सामग्री संबंधित पक्षों के साथ साझा की जानी चाहिए। अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर 2026 को होगी।

Share:

Comments

Leave a comment