पटाखों पर बैन नहीं, लोगों में जगाएं जागरूकता: सुप्रीम कोर्ट ने दिया सुझाव

Kittu Kumari12 October 20262 min read0 viewsNCR
पटाखों पर बैन नहीं, लोगों में जगाएं जागरूकता: सुप्रीम कोर्ट ने दिया सुझाव

दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण और पटाखों के इस्तेमाल पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद संतुलित रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या हल नहीं होगी, बल्कि इसके लिए सुप्रीम कोर्ट पटाखे बैन के बजाय जन-जागरूकता और लोगों की स्वेच्छा से सुरक्षित विकल्पों को चुनने पर जोर दे रहा है। कोर्ट का मानना है कि स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और धार्मिक भावनाओं के बीच एक संतुलन बनाना जरूरी है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची व वी. मोहना की बेंच ने कहा कि ऐसे प्रतिबंधात्मक आदेश देना सही नहीं होगा जिन्हें लागू करना मुश्किल हो। सीजेआई ने जोर देकर कहा कि हमें नागरिकों को पटाखों से होने वाले स्वास्थ्य खतरों के प्रति जागरूक करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि लोगों को वापस अपनी मूल संस्कृति की ओर लौटना चाहिए, जहां केवल फुलझड़ियाँ और दीये जलाए जाते थे।

धार्मिक भावनाओं और स्वास्थ्य के बीच संतुलन की जरूरत

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने पटाखों को फोड़ने के धार्मिक आधार पर सवाल उठाए, जिस पर एमिकस क्यूरी (कोर्ट के मित्र) वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने टिप्पणी की कि अगर देवताओं को पता चले कि उनके नाम पर बच्चे बीमार हो रहे हैं, तो वे भी हैरान होंगे। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बिना उचित प्रवर्तन के प्रतिबंध निष्प्रभावी रहेंगे, क्योंकि पुलिस अधिकारियों के लिए हर गली में मौजूद रहना असंभव है।

अदालत ने इस बात पर सहमति जताई कि अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों पर रोक होनी चाहिए और कम हानिकारक विकल्पों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही, कोर्ट ने पराली जलाने की समस्या पर भी चर्चा की, जिस पर केंद्र सरकार ने अपनी अपडेटेड स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने की बात कही है। यह पूरी सुनवाई दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण, ठोस कचरा प्रबंधन और पराली जलाने जैसे गंभीर मुद्दों पर की गई स्वतः संज्ञान (suo motu) कार्यवाही का हिस्सा थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।

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