दिवाली पर पटाखे फोड़ना उत्सव की भावना के खिलाफ, सुप्रीम कोर्ट ने दी चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटाखों से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना दिवाली की भावना के खिलाफ है। जानें कोर्ट ने क्या निर्देश दिए।

Kittu Kumari2 November 20262 min read0 viewsNational
दिवाली पर पटाखे फोड़ना उत्सव की भावना के खिलाफ, सुप्रीम कोर्ट ने दी चेतावनी

देश की सबसे बड़ी अदालत ने दिवाली के दौरान पटाखों के इस्तेमाल और उससे होने वाले प्रदूषण पर बेहद सख्त टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण की रक्षा करना धार्मिक परंपराओं का ही एक हिस्सा है। कोर्ट ने कहा कि अगर दिवाली के जश्न में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जाता है और सभी जीवित प्राणियों के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा होता है, तो यह इस त्योहार के असली उद्देश्य को ही खत्म कर देता है।

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्न बी वराले की बेंच ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण और पटाखों के नियमन पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। कोर्ट ने प्राचीन भारतीय दर्शन का हवाला देते हुए कहा कि भारत के विचारकों ने हमेशा पर्यावरण को धर्म का अभिन्न अंग माना है। अदालत के मुताबिक, हमारे पूर्वजों के लिए सभी जीवित प्राणी एक समान थे और प्रकृति के तत्वों जैसे हवा, पानी, अग्नि, पृथ्वी और आकाश को ईश्वर मानकर उनकी पूजा की जाती थी।

धार्मिक परंपरा और स्वास्थ्य का संतुलन

DelhiBreakings की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

अदालत ने दिवाली के सामाजिक और भावनात्मक महत्व को स्वीकार किया, लेकिन यह भी याद दिलाया कि प्राचीन शास्त्रों जैसे 'स्कंदपुराण' और 'पद्मपुराण' में दीप जलाकर उत्सव मनाने का जिक्र है। कोर्ट ने गौर किया कि कुछ सदियों पहले बारूद के आने के बाद पटाखों का चलन शुरू हुआ, जिसने त्योहार के स्वरूप को बदल दिया। अब ये पटाखे गंभीर वायु और ध्वनि प्रदूषण के साथ-साथ भारी मात्रा में ठोस कचरा भी पैदा कर रहे हैं।

कोर्ट ने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग व्यक्तियों के स्वास्थ्य पर चिंता जताई। बेंच ने चेतावनी दी कि दिवाली के बाद कई दिनों तक हवा में रहने वाले सूक्ष्म कण (PM) इतने छोटे होते हैं कि शरीर उन्हें फिल्टर नहीं कर पाता और वे सीधे रक्त प्रवाह में मिलकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा करते हैं। दिल्ली-एनसीआर की भौगोलिक स्थिति और सर्दियों में हवा की धीमी गति इस समस्या को और ज्यादा बढ़ा देती है।

पर्यावरण और स्वास्थ्य की गंभीरता को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने एक विनियमित रास्ता अपनाया है। कोर्ट ने केवल प्रमाणित 'ग्रीन पटाखों' के निर्माण और बिक्री की अनुमति दी है। इसके तहत 4 से 6 नवंबर तक इनकी बिक्री हो सकेगी और 7 व 8 नवंबर को केवल निर्धारित समय (सुबह 6 से 7 और रात 8 से 10 बजे) के बीच ही इन्हें चलाने की अनुमति होगी। कोर्ट ने सख्त निर्देश दिया है कि 9 नवंबर से पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध फिर से लागू कर दिया जाएगा।

Share:

Comments

Leave a comment