जंतर मंतर को विरोध स्थल से हटाने का फैसला, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब

देश की राजधानी में विरोध प्रदर्शनों का सबसे बड़ा केंद्र रहे जंतर मंतर विरोध प्रदर्शन पर लगी रोक अब कानूनी लड़ाई में बदल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने जंतर मंतर को आधिकारिक विरोध स्थल की सूची से हटाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर संज्ञान लिया है। जस्टिस सूर्य कांत की अगुवाई वाली बेंच ने इस मामले को महत्वपूर्ण मानते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर यह प्रतिबंध असंवैधानिक है।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब 11 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने एक आदेश जारी कर जंतर मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर कर दिया। यह फैसला गृह मंत्रालय द्वारा गठित एक समिति की सिफारिशों के बाद लिया गया था। सरकार का दावा है कि केंद्रीय दिल्ली में ट्रैफिक जाम को कम करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। गौरतलब है कि 1993 में बोट क्लब पर प्रदर्शनों की रोक के बाद से ही जंतर मंतर शहर का मुख्य विरोध केंद्र बना हुआ था, जहां प्रदर्शन के लिए डीसीपी से एनओसी लेना अनिवार्य था।
नए स्थलों की चुनौतियां और विवाद
सरकार ने जंतर मंतर के विकल्प के तौर पर तीन नए स्थानों का चयन किया है: रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड। हालांकि, 14 अक्टूबर 2026 को दायर याचिका में इन नए स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया गया है। याचिका में कहा गया है कि इन जगहों पर साफ-सफाई, पीने के पानी और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, जिससे प्रदर्शनकारियों को भारी परेशानी होगी।
इसके अलावा, आलोचकों का मानना है कि प्रदर्शनों को सत्ता के केंद्रों से दूर बड़े मैदानों में भेजने से आंदोलनों का प्रभाव कम हो जाएगा, क्योंकि वहां अपनी बात पहुंचाने के लिए बहुत बड़ी भीड़ जुटानी होगी। वहीं, प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जंतर मंतर पर अब किसी भी तरह का प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत भी शामिल है।
हाल के दिनों में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) जैसे समूहों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर और कांग्रेस सहित INDIA गठबंधन के कार्यकर्ताओं ने भी यहां प्रदर्शन किए थे। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम पर हैं कि वह नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच संतुलन कैसे बनाता है।