DPDP एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मीडिया संगठनों की याचिका पर केंद्र से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के खिलाफ मीडिया संगठनों की याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

Kittu Kumari27 October 20262 min read0 viewsNational
DPDP एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मीडिया संगठनों की याचिका पर केंद्र से मांगा जवाब

देश के बड़े मीडिया संस्थानों के समूह 'डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन' (DNPA) द्वारा दायर एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। यह याचिका डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2023 के कुछ प्रावधानों को चुनौती देते हुए दायर की गई है। मीडिया संगठनों का मानना है कि यदि इस कानून को समाचार संस्थानों पर सख्ती से लागू किया गया, तो इससे देश में खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism) पूरी तरह खत्म हो सकती है।

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहाना की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। याचिका की पैरवी कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दिवान ने अदालत में दलील दी कि इस कानून के कारण पत्रकारों को उन लोगों से सहमति लेनी पड़ सकती है, जिनकी वे जांच कर रहे हैं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि ऐसी स्थिति में पत्रकार उन्हीं लोगों पर निर्भर हो जाएंगे जिनके खिलाफ वे रिपोर्ट लिख रहे हैं, जिससे न्यूज़ रूम কার্যত बंद हो सकते हैं। दिवान ने यह भी कहा कि इस कानून का उद्देश्य पत्रकारों को नियंत्रित करना नहीं था, लेकिन इसका मौजूदा स्वरूप एक तरह की 'प्री-सेंसरशिप' व्यवस्था जैसा हो सकता है।

प्रेस की आजादी और डेटा सुरक्षा के बीच संतुलन की बात

DelhiBreakings की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि नागरिकों के डेटा की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता के बीच एक संतुलन बनाना जरूरी होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता इस क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं, इसलिए वे सरकार और अदालत को यह समझने में मदद कर सकते हैं कि कानून का दुरुपयोग कहां हो सकता है और नागरिकों के अधिकारों को कैसे सुरक्षित रखा जाए।

मीडिया संगठनों ने कोर्ट से अंतरिम राहत की मांग की थी ताकि जानकारी जुटाने और रिपोर्टिंग करने के तरीके प्रभावित न हों, लेकिन अदालत ने फिलहाल इस कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट का मानना है कि दूसरे पक्ष (केंद्र सरकार) को सुने बिना कोई स्टे नहीं दिया जा सकता। अब इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।

गौरतलब है कि DNPA कई बड़े समाचार संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है। उनकी मुख्य चिंता डेटा के संग्रह, उपयोग और उसे हटाने से जुड़े नियमों को लेकर है, जो उनके अनुसार समाचार एकत्र करने और गोपनीय स्रोतों की रक्षा करने में बड़ी बाधा बन सकते हैं। इस कानून के कई महत्वपूर्ण प्रावधान मई 2027 से प्रभावी होने वाले हैं।

Share:

Comments

Leave a comment