दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से व्यापार ठप, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भेजा नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से बाधित हो रहे व्यापार पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। व्यापारियों ने जताई परेशानी।

देश की राजधानी दिल्ली के व्यापारिक केंद्रों पर जब विरोध प्रदर्शनों का असर पड़ता है, तो इसका सीधा असर दुकानदारों की जेब और आम जनता की सुविधा पर पड़ता है। इसी गंभीर मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अब केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई 'किराना कमेटी दिल्ली' और अन्य व्यापारिक संगठनों द्वारा दायर एक याचिका के बाद की गई है, जिसमें मांग की गई है कि मध्य दिल्ली में रैलियों और प्रदर्शनों पर उचित प्रतिबंध लगाया जाए, ताकि व्यापारिक गतिविधियां सुचारू रूप से चल सकें।
अदालत में व्यापारियों की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि विरोध प्रदर्शनों के कारण कनॉट प्लेस जैसे प्रमुख व्यावसायिक इलाकों की सड़कें सूनी हो जाती हैं और दुकानदारों को अपनी दुकानें बंद करने पर मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि त्योहारों के सीजन में जब व्यापार चरम पर होता है, तब इस तरह की रुकावटों से रिटेल और होलसेल व्यापारियों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है। रोहतगी के अनुसार, प्रदर्शन स्थलों के आसपास रहने वाले करीब 50 लाख लोग इन गतिविधियों से सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं।
विरोध का अधिकार बनाम सार्वजनिक सुविधा
सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हालांकि विरोध प्रदर्शन करना एक मौलिक अधिकार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सार्वजनिक स्थानों पर अनिश्चित काल के लिए कब्जा कर लिया जाए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि प्रदर्शनों के लिए समय और अवधि निर्धारित होनी चाहिए और अधिकारियों को अनुमति देने या न देने के संबंध में स्पष्ट और तर्कसंगत आदेश जारी करने चाहिए।
इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे उन संगठनों को भी इस मामले में शामिल करें जो वर्तमान में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि उनके बिना मामले का पूरा फैसला नहीं किया जा सकता। यह मामला उन कई याचिकाओं का हिस्सा है जिनमें विरोध प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे व व्यापार पर पड़ने वाले प्रभाव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है। इस पूरी बहस में पुलिस की कार्रवाई, मेट्रो स्टेशनों की बंदी और इंटरनेट शटडाउन जैसे मुद्दों पर भी चिंता जताई गई है।