दिल्ली विरोध प्रदर्शन: पुलिस की सख्ती की जांच रिपोर्ट एक महीने में सौंपने का SC का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित सख्ती की जांच कर रही कमेटी को एक महीने में फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।

Kittu Kumari5 November 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली विरोध प्रदर्शन: पुलिस की सख्ती की जांच रिपोर्ट एक महीने में सौंपने का SC का निर्देश

दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा की गई कथित सख्ती और ज्यादतियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह अपनी शुरुआती फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट एक महीने के भीतर जमा करे। कोर्ट ने साफ किया कि कमेटी केवल नई शिकायतों के इंतजार में अपने काम को अनिश्चित काल के लिए नहीं रोक सकती।

जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि कमेटी के पास पहले से ही जो सामग्री और सबूत मौजूद हैं, वह उनके आधार पर आगे बढ़ सकती है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगे जाएं और अदालत द्वारा तय किए गए दो प्राथमिकता वाले मुद्दों पर अपनी जांच शुरू कर उनके निष्कर्ष पेश किए जाएं।

सबूतों और शिकायतों में अंतर पर कोर्ट की टिप्पणी

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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक गंभीर बात गौर की कि याचिकाकर्ताओं द्वारा दावा किए गए सबूतों और वास्तव में कमेटी तक पहुंचे दस्तावेजों में काफी अंतर है। कोर्ट ने पाया कि कमेटी के पोर्टल और फिजिकल सबमिशन के जरिए बहुत कम शिकायतें मिली हैं। इसी वजह से अदालत ने याचिकाकर्ताओं और संबंधित वकीलों को निर्देश दिया है कि उनके पास मौजूद सभी वीडियो, शिकायतें और अन्य सबूत जल्द से जल्द कमेटी को भेजें।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कोई पीड़ित खुद कमेटी के पास नहीं गया है, लेकिन उसके समर्थन में किसी वकील या जनहितैषी व्यक्ति ने सबूत पेश किए हैं, तो कमेटी को उन सबूतों की भी जांच करनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी द्वारा 31 अक्टूबर को सौंपी गई रिपोर्ट पर असंतोष जताते हुए कहा कि वह केवल एक 'स्टेटस रिपोर्ट' थी, जिसमें आरोपों पर कोई ठोस निष्कर्ष नहीं थे। कोर्ट ने कहा कि जब तक गोपनीयता का कोई विशेष कारण न हो, कमेटी को अपने निष्कर्ष संबंधित पक्षों के साथ साझा करने चाहिए। अब इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

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