दिल्ली में पटाखों की खुली बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के बाजारों में पटाखों की खुली बिक्री पर चिंता जताई है और केंद्र सरकार से इन नियमों के उल्लंघन की जांच करने को कहा है।

दिवाली के करीब आते ही दिल्ली के बाजारों में पटाखों की रौनक तो दिख रही है, लेकिन यह रौनक सुप्रीम कोर्ट की नजर में नियमों की अनदेखी है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के बाजारों में पटाखों की खुलेआम बिक्री पर गहरी चिंता जताई है। कोर्ट ने एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्रतिबंधों के बावजूद बाजारों में अलग-अलग तरह के पटाखे आसानी से उपलब्ध हैं, जो कि अदालत के आदेशों का सीधा उल्लंघन है।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्न बी वराले की बेंच ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से इन कथित उल्लंघनों की जांच करने को कहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अखबार में छपी तस्वीरों और रिपोर्ट से पता चलता है कि लाइसेंस वाले और बिना लाइसेंस वाले, साथ ही बिना क्यूआर कोड वाले पटाखे भी खुलेआम बेचे जा रहे हैं।
ग्रीन पटाखों के लिए तय थे कड़े नियम
गौरतलब है कि 2 नवंबर को शीर्ष अदालत ने दिल्ली-एनसीआर में एक सीमित समय के लिए केवल प्रमाणित 'ग्रीन पटाखों' के निर्माण, बिक्री और चलाने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि 4 से 6 नवंबर तक केवल अनुमोदित ग्रीन पटाखों की बिक्री होगी और 7 व 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे के बीच इन्हें चलाया जा सकेगा। इसके साथ ही 9 नवंबर 2026 से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध फिर से लागू हो जाएगा।
अदालत ने यह भी साफ किया था कि अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और शिक्षण संस्थानों के 300 मीटर के दायरे को 'नो-क्रैकर जोन' घोषित किया जाएगा, जहां किसी भी तरह के पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी।
कोर्ट ने सख्त निर्देश दिए थे कि केवल वही पटाखे बेचे जाएं जिनके पास CSIR-NEERI प्रमाणन और PESO लाइसेंस हो। हर बॉक्स सीलबंद होना चाहिए और उस पर एक विशिष्ट क्यूआर कोड होना अनिवार्य है, जिसमें निर्माता और टेस्ट सर्टिफिकेट की पूरी जानकारी हो। इसके अलावा, 'लड़ी' वाले पटाखों और बेरियम युक्त पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि क्यूआर कोड के नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो निर्माता का रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।