ECI के खिलाफ राहुल गांधी और INDIA गठबंधन की याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने निकालीं 14 खामियां

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और INDIA गठबंधन के नौ अन्य नेताओं द्वारा चुनाव आयोग (ECI) के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने आपत्ति जताई है। कोर्ट की रजिस्ट्री ने इस याचिका में कुल 14 तकनीकी खामियां (defects) बताई हैं, जिन्हें ठीक करने को कहा गया है। यह याचिका चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी।
सबसे महत्वपूर्ण आपत्ति इस बात पर है कि याचिकाकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य चुनाव आयुक्तों (एसएस संधू और विवेक जोशी) को व्यक्तिगत रूप से प्रतिवादी (respondent) बनाया है। रजिस्ट्री ने सवाल किया है कि चूंकि यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है, इसलिए निजी तौर पर इन अधिकारियों को इसमें क्यों शामिल किया गया है।
दस्तावेजों की कमी और तकनीकी गलतियां
रजिस्ट्री ने 12 अक्टूबर को अपनी आपत्तियों में स्पष्ट किया है कि याचिका में कई बुनियादी कमियां हैं। इनमें शामिल हैं:
- दस्तावेजों का अभाव: याचिकाकर्ता नंबर 3 से 11 के वकालतनामा गायब हैं और याचिकाकर्ता नंबर 2 के पहचान पत्र की स्पष्ट कॉपी नहीं दी गई है।
- तथ्यात्मक गलतियां: याचिका में दिए गए कुछ दस्तावेजों (Annexures) की तारीखें और केस नंबर आपस में मेल नहीं खा रहे हैं। साथ ही, एक जरूरी फैसले की कॉपी संलग्न नहीं की गई है।
- प्रस्तुतिकरण में कमी: कोर्ट ने कहा है कि कुछ पन्ने धुंधले हैं, फॉन्ट बहुत छोटा है और पेज नंबरिंग में गड़बड़ी है। कुछ रंगीन प्रतियों की मांग भी की गई है।
- कोर्ट फीस: याचिकाकर्ताओं को 220 रुपये की अतिरिक्त कोर्ट फीस जमा करने का निर्देश दिया गया है।
गौरतलब है कि इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण, फॉर्म 6 में बदलाव और मतदाताओं के नाम हटाने या जोड़ने की प्रक्रिया में अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया है। INDIA गठबंधन के नेताओं ने मांग की है कि चुनाव आयोग की फाइलों, एजेंडा और मीटिंग के मिनट्स की जांच की जाए और मतदाता डेटाबेस का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। उनका कहना है कि बिना नोटिस और सुनवाई के किसी भी मतदाता का नाम नहीं हटाया जाना चाहिए।
यह याचिका मुख्य न्यायाधीश के उस लिखित संचार के बाद दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि इसी तरह के मुद्दों वाली अन्य याचिकाएं 13 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं और याचिकाकर्ता 12 अक्टूबर को अपनी बात रख सकते हैं।