दिल्ली वोटर लिस्ट संशोधन: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को समय सीमा बढ़ाने का दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में वोटर लिस्ट के विशेष गहन संशोधन (SIR) की समय सीमा बढ़ाने और पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाने का निर्देश दिया है।

दिल्ली में वोटर लिस्ट के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया है कि वह मतदाता पंजीकरण की समय सीमा को बढ़ाए और एनरोलमेंट की प्रक्रिया को सरल बनाए ताकि कोई भी पात्र नागरिक वोट देने के अधिकार से वंचित न रहे।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले 'फॉर्म 6' में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि यह फॉर्म तय है और इसे बदला नहीं जा सकता। साथ ही, अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह मतदाताओं को दोबारा शामिल करने के लिए किसी भी तरह की 'कट-ऑफ डेट' (अंतिम तिथि) लागू न करे।
चुनाव आयोग की प्रतिबद्धता और अगली कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव आयोग ने दावों, नामांकन फॉर्म और आपत्तियों को जमा करने की समय सीमा बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। कोर्ट ने आयोग को इन निर्देशों को लागू करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। इस बीच, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जानकारी दी है कि अब तक जारी किए गए 33.14 लाख नोटिसों में से 31.26 लाख (लगभग 94.34%) प्रोसेस किए जा चुके हैं। अंतिम मतदाता सूची 4 दिसंबर, 2026 को प्रकाशित होने वाली है।
मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने एक हलफनामा दायर कर यह स्पष्ट किया कि विशेष गहन संशोधन (SIR) से जुड़े सभी आदेश सर्वसम्मति से लिए गए थे, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्त शामिल थे। आयोग ने किसी भी एकतरफा फैसले के आरोपों को खारिज कर दिया है।
दूसरी ओर, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस और राकेश कुमार सिंह जैसे याचिकाकर्ताओं द्वारा दी गई कानूनी चुनौतियों पर सुनवाई अब 17 नवंबर, 2026 तक के लिए टाल दी गई है, ताकि याचिकाकर्ता आयोग के हलफनामे पर अपना जवाब दे सकें।