सुप्रीम कोर्ट का स्पष्टीकरण: दाइची-फोर्टिस विवाद में बैंकों की केवल संबंधित लेन-देन की होगी जांच

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्पष्ट किया है कि दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फॉरेसिक ऑडिट के आदेश का दायरा फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड (FHL) और उसकी होल्डिंग कंपनी फोर्टिस हेल्थकेयर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड (FHHPL) तक ही सीमित है। कोर्ट ने साफ किया कि बैंकों को इस ऑडिट के दायरे में नहीं रखा गया है, बल्कि केवल उन विशिष्ट लेन-देन से जुड़े बैंक रिकॉर्ड की ही जांच की जाएगी जो FHL, FHHPL और निर्णय ऋणियों से संबंधित हैं। यह महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमलया बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने यस बैंक और एक्सिस बैंक की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिकाकर्ताओं का पक्ष और आदेश का दायरा
सुनवाई के दौरान यस बैंक और एक्सिस बैंक ने अदालत के सामने दलील दी थी कि दिल्ली हाई कोर्ट का 31 अगस्त का आदेश बहुत व्यापक है। बैंकों की आशंका थी कि इस आदेश की वजह से ऐसा प्रतीत हो सकता है कि फॉरेसिक ऑडिट सीधे तौर पर बैंकों के खिलाफ ही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बैंकों से जुड़े निर्देशों को केवल उन वाणिज्यिक लेन-देन के संदर्भ में ही पढ़ा जाना चाहिए, जिसमें निर्णय ऋणी, FHL और FHHPL शामिल हैं। इस मामले में यस बैंक और एक्सिस बैंक की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दिवाक और अन्य वकील पेश हुए थे।
विवाद की पृष्ठभूमि और पारेखा
यह पूरा कानूनी मामला दाइची सां क्यो द्वारा पूर्व फोर्टिस प्रमोटरों मलविंदर मोहन सिंह और शिविन्डर मोहन सिंह के खिलाफ मध्यस्थता पुरस्कार (arbitral award) के निष्पादन से जुड़ा हुआ है। रैनबैक्सी शेयरों की बिक्री को लेकर हुए विवाद के बाद दाइची को ₹2,562 करोड़ का भुगतान ब्याज सहित करने का निर्देश दिया गया था। इसी पुरस्कार को लागू कराने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने FHL शेयरों के गिरवी रखने, बिक्री और हस्तांतरण, सुरक्षित ऋण और फंड की आवाजाही से जुड़े लेन-देन की जांच के लिए फॉरेसिक ऑडिट का आदेश दिया था।
बैंकों और वित्तीय संस्थानों के रिकॉर्ड की जांच
हाई कोर्ट के आदेश में यस बैंक, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, आरबीएल बैंक, डीसीबी बैंक, इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस, सिटीकॉर्प फाइनेंस और कोटक महिंद्रा इन्वेस्टमेंट्स सहित कुल 17 बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करने के निर्देश दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने अब यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि बैंकों की संलिप्तता केवल उन रिकॉर्ड्स की जांच तक सीमित है जो ऑडिट के दायरे में आने वाले विशिष्ट लेन-देन से जुड़े हैं। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने 25 सितंबर को FHL की उस चुनौती को भी खारिज कर दिया था जिसमें फॉरेसिक ऑडिट के निर्देश को चुनौती दी गई थी।