नयी दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ अदालतों में दायर की जा रही याचिकाओं के बीच, सीजेपी के सौरव दास ने कहा है कि न्यायपालिका को ऐसे मामलों की सुनवाई करनी चाहिए, लेकिन यह भी कहा कि जवाबदेही की मांग को अदालतों में आउटसोर्स नहीं किया जा सकता है। सौरव दास ने एक्स पर पोस्ट करके यह बात कही। नागरिक संवैधानिक अदालतों का रुख कर सकते हैं और न्यायिक आदेश मांग सकते हैं, लेकिन चुनाव आयोग के कामकाज पर जवाबदेही का सवाल अंततः जनता द्वारा हल किया जाने वाला एक लोकतांत्रिक मामला बना हुआ है।
सौरव दास ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का जिक्र किया। उन्होंने जस्टिस जयमाल्य बागची की एक टिप्पणी का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि जो मतदाता 'इस बार' वोट नहीं दे पाए, वे 'अगली बार' वोट दे सकते हैं। दास ने इस पर सवाल उठाया कि चोरी हुए चुनाव के लिए कोई अगली बार नहीं होती है।
यह बयान तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के कामकाज और देशव्यापी एसआईआर अभ्यास को लेकर चल रहे विवाद के बीच आया है। एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची और डेटा प्रबंधन से जुड़े मामलों पर रिकॉर्ड पर आपत्ति जताई थी। चुनाव आयोग ने आंतरिक कलह के सुझावों को खारिज कर दिया है।
आयोग ने कहा है कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।