'सरकार समलैंगिक जज के लिए तैयार नहीं थी', सौरभ किरपाल की नियुक्ति पर जस्टिस संजय किशन कौल का बड़ा खुलासा
पूर्व जस्टिस संजय किशन कौल ने बताया कि सरकार भारत का पहला समलैंगिक जज नियुक्त करने के लिए तैयार नहीं थी, जिस वजह से सौरभ किरपाल की नियुक्ति रुकी रही।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस संजय किशन कौल ने वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ किरपाल की दिल्ली हाईकोर्ट में जज के रूप में नियुक्ति को लेकर चल रहे लंबे गतिरोध पर एक बड़ा खुलासा किया है। जस्टिस कौल के मुताबिक, सौरभ किरपाल की नियुक्ति में देरी की असली वजह सरकार की वह सोच थी, जिसमें उन्हें लगा कि देश अभी एक समलैंगिक (Gay) जज को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।
जस्टिस कौल ने बताया कि हालांकि सार्वजनिक तौर पर किरपाल के विदेशी पार्टनर की सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला दिया गया था, लेकिन अनौपचारिक चर्चाओं में यह बात सामने आई कि सरकार भारत के पहले खुले तौर पर समलैंगिक जज को नियुक्त करने में हिचकिचा रही थी। उन्होंने कहा कि सौरभ किरपाल एक बेहतरीन और अकादमिक रूप से सक्षम वकील हैं और उन्हें जज न बना पाना न्यायपालिका के लिए एक नुकसान था।
कॉलेजियम और सरकार के बीच का टकराव
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए 19 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक दुर्लभ कदम उठाते हुए अपने प्रस्ताव और सरकार की आपत्तियों को सार्वजनिक कर दिया था। कॉलेजियम ने स्पष्ट किया था कि किसी व्यक्ति का समलैंगिक होना उसकी योग्यता को कम नहीं करता और न ही यह उसे उच्च संवैधानिक पद संभालने से अयोग्य बनाता है।
जस्टिस कौल ने बताया कि कॉलेजियम को उनके नाम की सिफारिश दोहराने में कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन सरकार ने न तो फाइल को मंजूरी दी और न ही इसे पूरी तरह खारिज किया, जिससे यह मामला एक कानूनी और संस्थागत अधर में लटक गया।
- अक्टूबर 2017: दिल्ली हाईकोर्ट कॉलेजियम ने सिफारिश की।
- नवंबर 2021: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मंजूरी दी।
- नवंबर 2022: केंद्र सरकार ने फाइल वापस भेजी।
- जनवरी 2023: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सिफारिश को फिर से दोहराया।
जस्टिस कौल ने यह भी साझा किया कि सौरभ किरपाल ने कभी भी जज बनने की अपनी सहमति वापस नहीं ली। उन्होंने अपनी कम्युनिटी के समर्थन के लिए 62 वर्ष की आयु तक इस पद के लिए इंतजार करने की इच्छा जताई थी। जस्टिस कौल के अनुसार, कॉलेजियम ने इस सिफारिश को इसलिए नहीं हटाया क्योंकि ऐसा करना कॉलेजियम के लिए काफी शर्मनाक होता।