सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने से 7 की मौत, प्रशासन ने शुरू किया बड़ा एक्शन
सत्य निकेतन में 'हॉस्टल डेज़' बिल्डिंग गिरने से 7 लोगों की जान गई। MCD ने 5 अधिकारियों को किया सस्पेंड, कई गिरफ्तार।

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जहां 'हॉस्टल डेज़' नाम की पांच मंजिला आवासीय इमारत ढह गई। इस दर्दनाक हादसे में सात लोगों की जान चली गई। इस घटना ने राजधानी में छात्रों के रहने के लिए बनाए गए पीजी और हॉस्टलों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं और बिल्डिंग मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए अक्षत सिंह यादव, अर्पित झा, अभिषेक कुमार और सुरेंद्र सिंह के परिजनों को 10-10 लाख रुपये के मुआवजे के चेक वितरित किए हैं।
लापरवाही पर गिरी गाज, कई अधिकारी सस्पेंड
नगर निगम (MCD) की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस इमारत का कोई स्वीकृत बिल्डिंग प्लान नहीं था। इस बड़ी लापरवाही के बाद एमसीडी ने कड़ा कदम उठाते हुए एक डिप्टी कमिश्नर और तीन इंजीनियरों समेत कुल पांच अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है।
दिल्ली मेयर प्रवेश वाही ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आदेश दिया है कि चार मंजिल से अधिक की सभी अवैध संरचनाओं को तुरंत सील किया जाए। इसी कड़ी में 6 सितंबर से 10 अक्टूबर के बीच एमसीडी ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की, जिसमें 1,046 संपत्तियों की जांच की गई, 282 यूनिट्स को सील किया गया और 47 खतरनाक इमारतों को जमींदोज कर दिया गया।
इस मामले में पुलिस ने सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए 81 वर्षीय पूर्व वायु सेना सार्जेंट हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता, बेटे महेश गुप्ता, पीजी ऑपरेटर सुधांशु और लेबर कॉन्ट्रैक्टर सनोज को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, एक अन्य ऑपरेटर शुभम त्यागी अभी भी फरार है। कोर्ट ने तीन आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने इस त्रासदी के बाद सख्त रुख अपनाते हुए एक हफ्ते के भीतर सभी पीजी आवासों के निरीक्षण का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट के कानूनी ढांचे पर रिपोर्ट मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले पर नजर बनाए रखने की बात कही है ताकि देश भर में अवैध निर्माण और जमीन के गलत इस्तेमाल को रोका जा सके। दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी ने प्रभावित परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये तक के मुआवजे और सभी इमारतों के अनिवार्य स्ट्रक्चरल ऑडिट की मांग की है।