सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: दिल्ली पुलिस ने 6 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट
दिल्ली पुलिस ने सत्य निकेतन के 'हॉस्टल डेज़' हादसे में 6 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। जानें क्या थी लापरवाही।

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 'हॉस्टल डेज़' बिल्डिंग गिरने के दर्दनाक हादसे में दिल्ली पुलिस ने अब कानूनी शिकंजा कस दिया है। पुलिस ने इस मामले में छह लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। यह वह हादसा था जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया था, क्योंकि इस घटना में सात लोगों की जान चली गई थी और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। पटियाला हाउस कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कौतुक भारद्वाज ने इस चार्जशीट पर संज्ञान लिया है और अब 19 नवंबर 2026 को दस्तावेजों की जांच के लिए तारीख तय की है।
अवैध निर्माण और लापरवाही ने ली सात जानें
पुलिस की जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। करीब 40 से 50 साल पुरानी इस पांच मंजिला इमारत को अवैध तरीके से बदला जा रहा था। जांच में पाया गया कि बेसमेंट को मलबे से भर दिया गया था और सबसे बड़ी लापरवाही यह थी कि ग्राउंड फ्लोर की एक लोड-बेयरिंग दीवार को सिर्फ एक दुकान बनाने के लिए हटा दिया गया था। इसी वजह से पूरी इमारत की मजबूती खत्म हो गई और वह ताश के पत्तों की तरह ढह गई।
इस मामले में पुलिस ने प्रॉपर्टी मालिकों हरि राम गुप्ता और उर्मिला गुप्ता, बिल्डिंग मैनेजर महेश गुप्ता, लेबर कॉन्ट्रैक्टर सनोज कुमार और पीजी ऑपरेटर्स सुधांशु लवनीश कुमार और शुभम त्यागी को आरोपी बनाया है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें शामिल हैं:
- धारा 105: गैर इरादतन हत्या (Culpable homicide not amounting to murder)
- धारा 125(a): जीवन को खतरे में डालने वाले लापरवाही भरे कार्य
- धारा 290: निर्माण या मरम्मत के दौरान लापरवाही
- धारा 115(2): स्वेच्छा से चोट पहुँचाना
- धारा 324(2) और 324(4): संपत्ति को नुकसान पहुँचाना
- धारा 3(5): साझा इरादा (Common intention)
इस हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए थे। साथ ही, नगर निगम (MCD) ने अपनी जिम्मेदारी तय करते हुए दक्षिण जोन के डिप्टी कमिश्नर और चार इंजीनियरों समेत पांच अधिकारियों को पेशेवर लापरवाही के चलते निलंबित कर दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने अब तक आरोपियों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है।