सत्य निकेतन इमारत ढहने का मामला: कोर्ट ने सात मौतों के बाद हरिराम गुप्ता की जमानत याचिका खारिज की

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने हाल ही में सत्य निकेतन इमारत ढहने के मामले में हरिराम गुप्ता की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। 6 सितंबर को दिल्ली के सत्य निकेतन में एक इमारत ढह गई थी, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। हरिराम गुप्ता इस इमारत की मालकिन उर्मिला गुप्ता के पति हैं। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की जांच अभी शुरुआती दौर में है और अभी चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है। इसके अलावा, हादसे में घायल हुए पीड़ितों में से एक की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) एसपीएस ललेर ने बचाव पक्ष के वकील और लोक अभियोजक की दलीलें सुनने के बाद हरिराम गुप्ता की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
अदालत ने क्या कहा
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस बड़ी त्रासदी में सात लोगों की मौत हुई है और कई लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा, एक पीड़ित की हालत अभी भी गंभीर है। कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि आवेदक इमारत की मालकिन का पति है, परिसर का बिजली कनेक्शन उसके नाम पर है और अब तक जिन गवाहों से पूछताछ की गई है, उन्होंने साइट पर चल रहे काम में उसकी संलिप्तता के बारे में बताया है। संपत्ति से भारी मासिक किराया मिल रहा था, जबकि उसके रख-रखाव का सवाल अभी भी जांच का विषय है। इन सभी बातों को देखते हुए कोर्ट ने माना कि यह मामला इस स्तर पर नियमित जमानत देने के योग्य नहीं है।
बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की दलीलें
बचाव पक्ष की ओर से पेश हुए वकील ने बताया कि आरोपी एक वरिष्ठ नागरिक हैं, जिनकी उम्र लगभग 81-82 वर्ष है। वह भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्त सार्जेंट हैं और 1981 में सेवा से मुक्त हुए थे। उनका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। यह भी बताया गया कि वह टाइप-2 डायबिटीज मेलिटस और ग्विपटिन-प्रेरित बुलस पेम्फिगोइड से पीड़ित हैं, जिसके लिए उन्हें नियमित दवाइयों और स्टेरॉयड की आवश्यकता होती है। दूसरी ओर, अतिरिक्त लोक अभियोजक (एपीपी) ने जमानत का विरोध किया और कहा कि जांच शुरुआती चरण में है। परिवार के सदस्यों की भूमिका, इमारत के उपयोग और स्थल पर चल रहे काम की अभी जांच की जा रही है।
जेल प्रशासन को निर्देश
अदालत ने 18 सितंबर को अपने आदेश में जमानत याचिका खारिज करते हुए संबंधित जेल अधीक्षक को निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि आवेदक को बिना किसी देरी के सभी निर्धारित दवाइयां दी जाएं, जैसी सलाह दी गई हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस चरण में जांच जारी है और यह जमानत देने का सही समय नहीं है। बचाव पक्ष की यह दलील कि काम केवल भूतल को समतल करने का था, न कि निर्माण का, यह जांच और मुकदमे के दौरान परीक्षा का विषय है।