सत्य निकेतन हादसा: एक महीने बाद भी सन्नाटा, पीजी माफिया के डर से खाली हुए कमरे

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 6 सितंबर 2026 को हुआ वह दर्दनाक हादसा आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। एक पांच मंजिला पीजी बिल्डिंग गिरने से सात लोगों की जान चली गई थी, जिनमें पांच दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र शामिल थे। हादसे को एक महीना बीत चुका है, लेकिन इस इलाके की रौनक अब भी वापस नहीं आई है। सड़कों पर सन्नाटा है और छात्र डर के मारे इस इलाके को छोड़कर जा चुके हैं, जिसका सीधा असर यहां के स्थानीय कारोबार पर पड़ा है और बिजनेस में करीब 40% की गिरावट दर्ज की गई है।
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यह हादसा अवैध निर्माण और लापरवाही का नतीजा था। दुकान को बड़ा करने के चक्कर में एक लोड-बेयरिंग दीवार हटा दी गई थी और तीन ट्रक मलबे की डंपिंग की गई थी, जिसने पूरी इमारत को कमजोर कर दिया। इस मामले में पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए बिल्डिंग मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला, बेटे महेश, पीजी ऑपरेटर शुभम त्यागी, सुधांशु लवनीश कुमार और ठेकेदार सनोज को गिरफ्तार किया है।
प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा का हाल
इस हादसे ने दिल्ली के पीजी कल्चर की पोल खोलकर रख दी है। एमसीडी (MCD) ने अपनी लापरवाही मानते हुए दक्षिण जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार समेत पांच अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। जब 2,453 पीजी का सर्वे किया गया, तो पता चला कि इनमें से केवल 31 के पास फायर एनओसी और सिर्फ आठ के पास स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट था। इसके बाद एमसीडी ने एक्शन मोड में आते हुए 1,793 पीजी को सेफ्टी सर्टिफिकेट के नोटिस दिए, 774 ढांचों को ढहाने का आदेश दिया और 228 इमारतों को सील कर दिया है।
मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है, जिसने एमसीडी और दिल्ली यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूरे शहर में सुरक्षा ऑडिट की मांग की है। वहीं, सिटीजन जस्टिस पार्टी (CJP) ने 'पीजी माफिया' के खिलाफ स्वतंत्र जांच की मांग की है। डर का माहौल इतना है कि 6 अक्टूबर को चिराग दिल्ली में दरारें आने के बाद छात्रों को पीजी खाली करना पड़ा और साउथ एक्सटेंशन में भी छत गिरने की खबर आई। इस बीच, दिल्ली सरकार 'पेइंग गेस्ट अकोमोडेशन रेगुलेशन एंड सेफ्टी बिल, 2026' पर विचार कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।