दिल्ली: 11.73 लाख वोटरों के मताधिकार बचाने के लिए संजय सिंह ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र
AAP सांसद संजय सिंह ने चुनाव आयोग से दिल्ली के 11.73 लाख उन वोटरों के अधिकार बचाने की मांग की है जिन्हें 'अनुपस्थित' मार्क किया गया है।

आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने दिल्ली की वोटर लिस्ट में हुए बड़े बदलावों और उसमें बड़ी संख्या में नाम कटने को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक पत्र लिखकर मांग की है कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दौरान जिन 11.73 लाख लोगों को 'अनुपस्थित' या 'अप्राप्य' (untraceable) मार्क किया गया है, उनके वोट देने के अधिकार की रक्षा के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं।
संजय सिंह ने अपने पत्र में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 28 अक्टूबर को दिल्ली SIR मामले की सुनवाई के दौरान दिए गए निर्देशों का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि जिन वोटरों के नाम रिविजन के दौरान हटाकर ASDD (Absent, Shifted, Dead and Duplicate) लिस्ट में डाल दिए गए थे, उन्हें दोबारा वोटर लिस्ट में शामिल होने के लिए फॉर्म 8 या एनुमेरेशन फॉर्म जमा करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
फॉर्म 6 भरने की मजबूरी को बताया गलत
सांसद ने पत्र में स्पष्ट किया कि दिल्ली में पहले चरण के दौरान करीब 47 लाख वोटरों के नाम हटाए गए थे, जिनमें से 31.59 लाख को स्थायी रूप से शिफ्ट बताया गया और 11.73 लाख को अनुपस्थित माना गया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का जिक्र किया जिसमें यह कहा गया था कि नाम कटने वाले वोटरों को 'फॉर्म 6' भरने के लिए मजबूर करना एक गलती है, क्योंकि फॉर्म 6 में यह घोषणा होती है कि आवेदक पहली बार वोटर बन रहा है, जबकि ये लोग पहले से पंजीकृत वोटर थे।
संजय सिंह ने जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से निर्देश दिया था कि निवास स्थान बदलने के कारण नाम कटने वालों को फॉर्म 8 जमा करने की अनुमति दी जाए। कोर्ट ने यह भी माना कि लोग आर्थिक कारणों या नौकरी की वजह से अक्सर घर बदलते हैं, इसलिए उन्हें केवल इस आधार पर बाहर नहीं किया जाना चाहिए कि वे रिविजन के समय अपने पुराने पते पर नहीं मिले।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि केवल डेडलाइन छूट जाने की वजह से किसी नागरिक का वोट देने का मौलिक अधिकार नहीं छीना जा सकता। उन्होंने चुनाव आयोग और दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से आग्रह किया है कि वे एक सरल प्रक्रिया बनाएं ताकि प्रभावित लोग बिना किसी परेशानी के अपने नाम दोबारा जुड़वा सकें। साथ ही, उन्होंने मांग की कि जरूरी दस्तावेज हिंदी में उपलब्ध कराए जाएं और व्यापक प्रचार किया जाए ताकि लोग अपनी पात्रता की जांच कर सकें।