संजय सिंह ने CEC को लिखा पत्र, दिल्ली के 11.73 लाख वोटरों के अधिकार बचाने की मांग

आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने चुनाव आयोग से दिल्ली के 11.73 लाख वोटरों के मतदान अधिकार बचाने की मांग की है।

Kittu Kumari4 November 20262 min read0 viewsDelhi Local
संजय सिंह ने CEC को लिखा पत्र, दिल्ली के 11.73 लाख वोटरों के अधिकार बचाने की मांग

आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने दिल्ली के करीब 11.73 लाख मतदाताओं के वोटिंग अधिकारों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक औपचारिक पत्र लिखकर मांग की है कि चुनाव आयोग इन मतदाताओं के मताधिकार की सुरक्षा के लिए तुरंत जरूरी कदम उठाए। ये वे लोग हैं जिन्हें हाल ही में हुए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के दौरान 'अनुपस्थित' या 'अप्राप्य' (untraceable) श्रेणी में डाल दिया गया था।

संजय सिंह ने अपने पत्र में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 28 अक्टूबर को दिए गए निर्देशों का हवाला दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाकर उन्हें 'अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लिकेट' (ASD) सूची में डाला गया है, उन्हें अपना पंजीकरण बहाल करने के लिए फॉर्म 8 या गणना फॉर्म जमा करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

फॉर्म 6 और फॉर्म 8 के विवाद पर उठाए सवाल

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संजय सिंह का तर्क है कि पहले से पंजीकृत मतदाताओं से फॉर्म 6 भरवाना एक बड़ी प्रक्रियात्मक गलती है। उन्होंने कहा कि फॉर्म 6 मुख्य रूप से उन लोगों के लिए होता है जो पहली बार वोटर बन रहे हैं। ऐसे में पुराने मतदाताओं को नए आवेदकों की तरह ट्रीट करना गलत है और इससे उनकी पहचान और पंजीकरण की प्रक्रिया प्रभावित होती है।

इस पूरे पुनरीक्षण अभियान के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि दिल्ली की मतदाता सूची से शुरुआती चरण में लगभग 47 लाख नाम हटाए गए। इनमें से 31.59 लाख लोगों को 'स्थायी रूप से स्थानांतरित' माना गया, जबकि बाकी 11.73 लाख लोग ऐसे थे जिन्होंने तय समय सीमा के भीतर दस्तावेज जमा नहीं किए, जिसके कारण उन्हें अनुपस्थित या अप्राप्य मान लिया गया।

हालांकि, चुनाव आयोग ने 3 नवंबर को यह स्पष्ट किया था कि प्रभावित मतदाता बिना किसी डर के फॉर्म 6 का उपयोग कर सकते हैं और उन पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहा है और इस मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को होनी है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह पात्र नागरिकों को मताधिकार से वंचित होने से बचाने के लिए हस्तक्षेप करने को तैयार है।

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