संभल जामा मस्जिद सर्वे मामला: सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद कमेटी की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को संभल जामा मस्जिद कमेटी की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा मस्जिद के सर्वे के आदेश को चुनौती दी गई थी। जस्टिस पी. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा। इस मामले में हिंदू पक्ष ने धार्मिक अनुष्ठान करने का अधिकार मांगा है।
मस्जिद कमेटी और उत्तर प्रदेश सरकार की दलीलें
कमेटी की ओर से सीनियर वकील हुजेफा अहमदी और निजाम पाशा पेश हुए, जबकि हिंदू पक्ष की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने पक्ष रखा। मस्जिद कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें ट्रायल कोर्ट के सर्वे आदेश को सही ठहराया गया था। कमेटी का तर्क था कि यह सिविल सूट उपासना स्थल अधिनियम 1991 के तहत बाधित है और बिना नोटिस के कमिश्नर नियुक्त नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार ने कहा कि वह इस धार्मिक विवाद के गुण-दोष में नहीं जाएगी।
हिंदू पक्ष का पक्ष और पूरा मामला
हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि संभल जामा मस्जिद एक संरक्षित स्मारक है जो 1991 अधिनियम के अपवाद के अंतर्गत आता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मई 2025 में सर्वे के आदेश को बरकरार रखा था। यह पूरा मामला 2024 के उस सिविल सूट से जुड़ा है जिसमें हिंदू पक्ष ने दावा किया है कि मौजूदा जामा मस्जिद की जगह पर भगवान विष्णु के कल्कि अवतार का प्राचीन मंदिर था जिसे मुगल काल में गिराया गया था।