नई दिल्ली. युवराज सिंह मनचंदा हत्याकांड मामले में दिल्ली की साकेत कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस को कड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने पुलिस को 22 सितंबर को दोपहर 12:30 बजे तक मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड, फोरेंसिक साक्ष्य और दस्तावेज अदालत में पेश करने को कहा है। इसमें शव की बरामदगी, पहचान और अंतिम संस्कार से जुड़े सभी कागजात शामिल हैं। यह आदेश मृतक की बहन की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया है। याचिका में पुलिस द्वारा शव के निपटान और जल्दबाजी में किए गए अंतिम संस्कार पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।
अदालत के निर्देश के अनुसार, गुरुग्राम पुलिस को
आधिकारिक पुलिस लॉग, स्टेशन रिकॉर्ड, डीएनए सैंपल और जैविक सामग्री वाले फोरेंसिक रिपोर्ट जमा करने होंगे। इसके अलावा, सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड जैसे डिजिटल साक्ष्य भी देने होंगे। पुलिस को ज़िपनेट (ZIPNET) डेटाबेस की एंट्री और शव के पास से मिले सामान की रिकवरी से जुड़े दस्तावेज भी पेश करने होंगे। परिवार का आरोप है कि उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और निजी सामान नहीं दिया गया।
यह मामला 31 वर्षीय युवराज मनचंदा की हत्या से जुड़ा है जो अडानी रियल्टी में सेल्स मैनेजर थे। दक्षिण-पूर्व दिल्ली के पुलिस उपायुक्त विनीत कुमार ने बताया कि 11 सितंबर को गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। तकनीकी जांच के बाद पुलिस ने उत्तराखंड से दो आरोपियों
अनन्या वत्स और संयम सचदेवा को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने हत्या की बात कबूल की और बताया कि शव गुरुग्राम के बादशाहपुर इलाके में फेंका गया था। गुरुग्राम पुलिस ने 10 सितंबर को एक शव बरामद किया था और पोस्टमार्टम के बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। परिवार ने तस्वीरों से शव की पहचान युवराज के रूप में की। दिल्ली पुलिस ने दोनों आरोपियों को पांच दिन की हिरासत में लिया है और मामले की जांच जारी है।