दिल्ली में साहित्य अकादमी ने आयोजित किया संताली लेखक सम्मेलन, परंपरा और आधुनिकता पर हुई चर्चा

Kittu Kumari6 October 20261 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली में साहित्य अकादमी ने आयोजित किया संताली लेखक सम्मेलन, परंपरा और आधुनिकता पर हुई चर्चा

राजधानी दिल्ली के इंडियन सोशल इंस्टीट्यूट में 4 अक्टूबर 2026 को साहित्य अकादमी द्वारा एक विशेष संताली लेखक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संताली भाषा की बारीकियों को समझना और इस समृद्ध भाषा के साहित्य व परंपराओं को बढ़ावा देना था। इस मौके पर देश के जाने-माने संताली लेखक और भाषा प्रेमी एक मंच पर जुटे, जिन्होंने संताली साहित्य के बदलते स्वरूप और इसकी रचनात्मक अभिव्यक्तियों पर गहन विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम की शुरुआत में यूपीएससी के पूर्व उप सचिव मंगल मरंडी ने अपना संबोधन दिया। उन्होंने संताली लेखकों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए साहित्य के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया। वहीं, साहित्य अकादमी के संताली सलाहकार बोर्ड के सदस्य श्याम सी. टुडू ने स्वागत भाषण दिया, जिसमें उन्होंने अकादमी द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों, उद्देश्यों और साहित्यिक पुरस्कारों की विस्तृत जानकारी साझा की।

आधुनिक चेतना और लोक परंपराओं का संगम

सम्मेलन का एक मुख्य आकर्षण कविता पाठ का सत्र रहा, जिसकी अध्यक्षता सरोजिनी बेशरा ने की। इस सत्र का विषय 'समकालीन चेतना और आधुनिकता का संगम' रखा गया था, जिसमें कवियों ने अपनी रचनाओं के जरिए आधुनिक दौर में भाषा के बदलाव को पेश किया। इस आयोजन में सुनील हांसदा, बंधन सोरेन, कासुनाथ सोरेन, स्नेहा मंडी, सुप्रिया हांसदा और सुरेंद्रनाथ सोरेन जैसे कई साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा प्रेम सोरेन, अर्पिता हांसदा, बादल मंडी, डॉक्टर सोरेन, गुरुबारी हेम्ब्रोम और हाजम बास्के ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

इस सम्मेलन के दौरान केवल चर्चाएं ही नहीं हुईं, बल्कि कई शोध पत्र भी प्रस्तुत किए गए और नई पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम के अंतिम सत्र में संताली लोक परंपराओं के विश्लेषण और वर्तमान समय में साहित्यिक समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से बात की गई, ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।

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