सागरमंथन 2026: समुद्री व्यापार और तकनीक पर चर्चा के लिए दिल्ली जुटेंगे 75 देशों के दिग्गज

देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र बनने जा रही है। समुद्री क्षेत्र के भविष्य को तय करने के लिए 'सागरमंथन: द ग्रेट ओशन्स डायलॉग' के तीसरे संस्करण का आयोजन दिल्ली में किया जा रहा है। 7 से 9 अक्टूबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में दुनिया के करीब 75 देशों के 1,200 से ज्यादा वक्ता, प्रतिनिधि और विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समुद्री व्यापार, आधुनिक तकनीक, स्थिरता और आपसी सहयोग को बढ़ावा देना है।
इस भव्य आयोजन की सह-मेजबानी ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) और पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) द्वारा की जा रही है। साल 2026 के इस संस्करण की थीम "ब्लू ज्योग्राफियां, नई आकांक्षाएं: समुद्र में व्यापार, तकनीक और विश्वास" रखी गई है। बता दें कि सागरमंथन की शुरुआत 2024 में दिल्ली से हुई थी और 2025 में इसे मुंबई में आयोजित किया गया था। अब यह एक वार्षिक मंच बन चुका है जहां नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy), बंदरगाहों के विकास और समुद्री लॉजिस्टिक्स पर मंथन होता है।
वैश्विक नेताओं का जमावड़ा और मुख्य मुद्दे
आज के दौर में जब भू-राजनीतिक तनाव और जलवायु परिवर्तन ने समुद्री रास्तों को चुनौतीपूर्ण बना दिया है, तब यह संवाद और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इस सम्मेलन में बेल्जियम, यूरोपीय आयोग, मॉरीशस, भूटान, मोजाम्बिक, लिथुआनिया, ग्रीस, म्यांमार और नॉर्वे जैसे देशों के मंत्री शिरकत लेंगे। साथ ही ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री केविन रड और मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद जैसे दिग्गज भी अपनी राय साझा करेंगे।
भारत की ओर से केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर और नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। इस पूरे संवाद को पांच मुख्य स्तंभों में बांटा गया है:
- स्टेडी स्ट्रेट्स: अस्थिर दुनिया में समुद्री प्रवाह की सुरक्षा।
- ब्लू ब्रेकथ्रू: जहाजों और जहाज निर्माण को पर्यावरण अनुकूल बनाना।
- कॉम्प्लेक्स सीज़: व्यापार, कनेक्टिविटी और उथल-पुथल का प्रबंधन।
- ओशन सोसाइटीज़: तटीय समुदायों, संस्कृति और आजीविका पर चर्चा।
- द हार्ट ऑफ द डील: बंदरगाह शहरों को आंतरिक क्षेत्रों से जोड़ना।
यह आयोजन भारत के 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' के साथ पूरी तरह मेल खाता है, जिसका लक्ष्य देश की लंबी अवधि की वृद्धि में बंदरगाहों और नीली अर्थव्यवस्था को केंद्र में रखना है। इस कार्यक्रम में डीपी वर्ल्ड लॉजिस्टिक्स पार्टनर के रूप में जुड़ा है, जबकि नीदरलैंड और नॉर्वे की सरकारें भी इसमें साझेदारी कर रही हैं।