भारत ने रचा इतिहास: सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने की दुनिया की पहली रोबोटिक सिस्टमिक लेफ्ट एट्रियोवेंट्रिकुलर वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी

लेखक महेन्द्र तिवारी के अनुसार, भारत ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है जिसने विश्व चिकित्सा समुदाय का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। नई दिल्ली स्थित वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने दुनिया की पहली रोबोटिक सिस्टमिक लेफ्ट एट्रियोवेंट्रिकुलर वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक करके इतिहास रच दिया है। यह उपलब्धि एक अत्यंत दुर्लभ और जटिल जन्मजात हृदय विकार से पीड़ित वयस्क मरीज पर सफलतापूर्वक अंजाम दी गई, जिससे यह सिद्ध होता है कि भारत अब वैश्विक स्तर पर नवाचार और नेतृत्व करने वाला देश बन चुका है। हृदय मानव शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है जिसमें चार वाल्व होते हैं जो रक्त के प्रवाह को सही दिशा में बनाए रखते हैं। एट्रियोवेंट्रिकुलर या एवी वाल्व हृदय के ऊपरी और निचले कक्षों के बीच रक्त प्रवाह को नियंत्रित करता है। इसके क्षतिग्रस्त होने पर सांस फूलना, अत्यधिक थकान, हृदय की धड़कनों में अनियमितता और हृदय विफलता जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जहां वाल्व को बदलना ही एकमात्र विकल्प बचता है।
जटिल हृदय संरचना और पारंपरिक सर्जरी की चुनौतियां
इस मामले की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मरीज सामान्य हृदय संरचना वाला नहीं था, बल्कि उसे कंजेनियली करेक्टेड ट्रांसपोज़िशन ऑफ़ द ग्रेट आर्टरीज़ यानी ccTGA नामक अत्यंत दुर्लभ जन्मजात विकार था। इस स्थिति में हृदय के निचले कक्षों की संरचना उलट जाती है और दायां निलय पूरे शरीर में रक्त पहुंचाने लगता है। इसके साथ ही मरीज को डेक्स्ट्रोकार्डिया भी था, जिसमें हृदय छाती के दाहिने भाग में स्थित होता है। ऐसी जटिल परिस्थितियों में पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी जोखिमपूर्ण होती है जिसमें छाती की हड्डी को काटना पड़ता है और अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण तथा लंबी रिकवरी की चुनौतियां जुड़ी होती हैं। इसके विपरीत रोबोटिक सर्जरी में छोटे चीरे लगाए जाते हैं और अत्याधुनिक रोबोटिक भुजाओं की सहायता से सर्जन विशेष कंसोल से उपकरणों को नियंत्रित करते हैं, जिससे मशीन गतिविधियों को अधिक सटीक और स्थिर रूप में मरीज तक पहुंचाती है।
अत्याधुनिक तकनीक और त्रि-आयामी पुनर्निर्माण का उपयोग
सफदरजंग अस्पताल की विशेषज्ञ टीम ने ऑपरेशन से पहले मरीज के हृदय का विस्तृत त्रि-आयामी पुनर्निर्माण तैयार किया। कंप्यूटर आधारित थ्री डी इमेजिंग की सहायता से पूर्व योजना बनाई गई ताकि किसी प्रकार की त्रुटि न हो। इसके बाद विशेष रूप से संशोधित रोबोटिक तकनीक का उपयोग करते हुए बाईं ओर से पहुंच बनाकर क्षतिग्रस्त वाल्व को हटाया गया और उसके स्थान पर नया कृत्रिम वाल्व सफलतापूर्वक लगाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार यह विश्व का पहला प्रलेखित मामला है जिसमें इस प्रकार की जटिल संरचना वाले मरीज पर इस तकनीक का सफल प्रयोग किया गया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग की अनुभवी टीम का वर्षों का अनुभव रहा, जिसका नेतृत्व प्रोफेसर डॉ. अनुभव गुप्ता ने किया, जबकि अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता शर्मा के नेतृत्व में यह संस्थान द्वारा संभव हुआ।
रोबोटिक सर्जरी के लाभ और सरकारी अस्पतालों की भूमिका
रोबोटिक कार्डियक सर्जरी के अनेक लाभ हैं जिनमें छाती को पूरी तरह खोलने की आवश्यकता न पड़ना, कम दर्द, कम रक्तस्राव और संक्रमण का खतरा घटना शामिल है। इससे अस्पताल में रहने की अवधि कम होती है और मरीज जल्दी अपने सामान्य जीवन पर लौट सकता है। पहले रोबोटिक सर्जरी निजी अस्पतालों तक सीमित थी, लेकिन अब सफदरजंग अस्पताल जैसी सरकारी संस्थाएं भी इसमें आगे आ रही हैं। इस सफलता से समाज के उन वर्गों को भी लाभ मिलता है जो महंगे निजी अस्पतालों का खर्च वहन नहीं कर सकते। साथ ही यह सफलता चिकित्सा शिक्षा और भारत की वैज्ञानिक क्षमता तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, जिससे भविष्य में रोबोटिक सर्जनों की संख्या बढ़ेगी और जटिल रोगों का उपचार सुरक्षित होगा।