नई दिल्ली में वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (VMMC) और सफदरजंग अस्पताल ने अपने किडनी ट्रांसप्लांट प्रोग्राम के तहत पहली बार सफल ड्यूल किडनी ट्रांसप्लांट किया है। यह जटिल सर्जरी अस्पताल के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जिसे अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता शर्मा के नेतृत्व में पूरा किया गया। इस प्रक्रिया में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चारू बंबा का भी पूरा सहयोग मिला।
19 सितंबर 2026 की रात को कमांड अस्पताल, चंडीमंदिर में 62 वर्षीय एक व्यक्ति को ब्रेन डेड घोषित किया गया था। उनके परिवार ने अंगदान का साहसी फैसला किया। डोनर की उम्र और अन्य मेडिकल कारणों के चलते उन्हें मार्जिनल डोनर माना गया था। ऐसी स्थिति में एक अकेली किडनी ट्रांसप्लांट करने से मरीज को पूरा फायदा नहीं मिलता। डोनर अंगों की भारी कमी को देखते हुए, सफदरजंग अस्पताल की ट्रांसप्लांट टीम ने दोनों किडनियों को एक ही मरीज में ट्रांसप्लांट करने का फैसला किया।
अंगदान और ट्रांसप्लांट का काम समय पर होना बहुत जरूरी होता है, इसलिए भारतीय वायु सेना (पश्चिमी कमान) ने अंगों को दिल्ली पहुंचाने में अहम लॉजिस्टिक मदद दी। डोनर का लिवर आर्मी अस्पताल (आर एंड आर), नई दिल्ली को दिया गया, जबकि दोनों किडनियां सफदरजंग अस्पताल लाई गईं।
यह सफल ड्यूल किडनी ट्रांसप्लांट यूरोलॉजी और रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के एचओडी डॉ. पवन वासुदेवा के नेतृत्व में डॉक्टरों की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने किया। इस टीम में डॉ. नीरज कुमार, डॉ. संदीप कुमार और डॉ. गौरव वशिष्ठ शामिल थे। इस सफलता से उन मरीजों को नई उम्मीद मिली है जो डायलिसिस पर निर्भर हैं।