'लोकतंत्र में आवाज नहीं दबाई जा सकती', दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर बोले सचिन पायलट
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई की निंदा की और कहा कि भारत एक शांतिपूर्ण लोकतंत्र है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने वाले युवाओं और राजनीतिक नेताओं को निशाना क्यों बनाया जा रहा है। पायलट का कहना है कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना एक मौलिक अधिकार है और इसे किसी भी कीमत पर दबाया नहीं जा सकता।
एक इंटरव्यू के दौरान सचिन पायलट ने कहा कि जब युवा अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरते हैं, तो उन्हें किसी राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के बावजूद छात्रों पर लाठियां चलाई गईं, पेलेट गन का इस्तेमाल हुआ और उनके खिलाफ मामले दर्ज कर उनके अकाउंट तक सीज कर दिए गए। पायलट ने दिल्ली में लगाए गए प्रतिबंधों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर प्रशासन किस बात से डर रहा है? क्या शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठे लोग आतंकवादी या गद्दार थे?
बांग्लादेश की तुलना को नकारा, कहा- भारत एक स्वस्थ लोकतंत्र
जब सचिन पायलट से यह पूछा गया कि क्या बांग्लादेश जैसी अराजक स्थितियां भारत में भी हो सकती हैं, तो उन्होंने इस तुलना को सिरे से खारिज कर दिया। पायलट ने स्पष्ट किया कि भारत एक शांतिपूर्ण और स्वस्थ लोकतंत्र है, जहां बदलाव केवल जनता की इच्छा और निष्पक्ष चुनावों के जरिए ही आता है। उन्होंने कहा कि देश में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है और कांग्रेस पार्टी कभी भी हिंसा का समर्थन नहीं करती।
पायलट ने संविधान की सर्वोच्चता पर जोर देते हुए कहा कि देश चलाने वालों को खुद से ऊपर संविधान को रखना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का जिक्र करते हुए कहा कि जब वे मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने की कोशिश कर रहे थे, तब उन्हें बसों में धकेला गया, जो लोकतंत्र के लिए एक चिंताजनक संकेत है।
अंत में उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि सरकारी एजेंसियों के दबाव, धमकियों या बल प्रयोग से कांग्रेस पीछे नहीं हटेगी। पार्टी अपनी मांगों पर अडिग रहेगी क्योंकि लोकतंत्र में आवाज को घोंटा नहीं जा सकता।