RTI से बड़ा खुलासा: दिल्ली छात्र प्रदर्शन में पैलेट गन से कम से कम 10 लोग हुए घायल

एक आधिकारिक Right to Information (RTI) जवाब से यह पुष्टि हुई है कि 20 जुलाई 2026 को दिल्ली में छात्र प्रदर्शन और 'Parliament March' के दौरान पैलेट गन लगने से कम से कम 10 लोग घायल हुए थे। यह खुलासा पूर्व तृणमूल कांग्रेस सांसद साकेत गोखले द्वारा दायर RTI के आधार पर सामने आया है, जिससे घायलों की पहले बताई गई संख्या दोगुनी हो गई है। Lady Hardinge Medical College ने नौ लोगों को पैलेट गन की चोटों के इलाज की पुष्टि की है, जबकि Safdarjung Hospital ने एक ऐसा मामला दर्ज किया है। AIIMS और Ram Manohar Lohia Hospital से अन्य घायलों को लेकर जवाब अभी आने बाकी हैं।
मुख्य बिंदु:
- 20 जुलाई 2026 के प्रदर्शन में पैलेट गन से कम से कम 10 लोग घायल हुए।
- Lady Hardinge Medical College में 9 और Safdarjung Hospital में 1 घायल का इलाज हुआ।
- CRPF की आंतरिक जांच में सामने आया कि RAF जवान ने 7 पैलेट राउंड चलाए थे, जिनमें से 5 प्रदर्शनकारियों को लगे।
- Supreme Court ने दिल्ली सरकार को घायलों का सही इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
पुलिस का इनकार और जांच में खुलासा
Delhi Police ने शुरुआत में पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया था और कहा था कि उनके पास ऐसे हथियार नहीं हैं और न ही वे इनका इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, Parliament Street Police Station की 22 जुलाई 2026 की जनरल डायरी के रिकॉर्ड बताते हैं कि Rapid Action Force (RAF) ने एक DCP-rank अधिकारी के आदेश पर एंटी-रियोंट गन के दो राउंड और पैलेट गन के दो राउंड चलाए थे। CRPF की एक बाद की आंतरिक जांच से यह भी पता चला कि एक RAF जवान ने कुल सात पैलेट राउंड चलाए, जिनमें से पांच प्रदर्शनकारियों को लगे। केंद्र सरकार संसद में इस मामले पर चर्चा की तैयारी कर रही है, और Leader of Opposition Rahul Gandhi के पत्र के बाद Home Minister Amit Shah द्वारा जवाब दिए जाने की उम्मीद है।
Supreme Court के निर्देश और प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
Supreme Court of India ने भी पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की है और दिल्ली सरकार को घायलों के लिए उचित इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने 'असाधारण परिस्थितियों' में पुलिस के पैलेट गन इस्तेमाल के अधिकार को स्वीकार करते हुए नियमों का पालन करने और न्यायिक जांच की संभावना पर जोर दिया। 4 अगस्त 2026 को, शीर्ष अदालत ने भीड़ नियंत्रण में पैलेट गन के इस्तेमाल के लिए सख्त प्रोटोकॉल बनाने की मांग की और केंद्र सरकार से विस्तृत Standard Operating Procedures (SOPs) मांगे। NEET paper leaks के आरोपों के कारण हुआ 20 जुलाई का प्रदर्शन एक unauthorized 'Sansad Chalo' मार्च था, जो New Delhi में निषेधाज्ञा (Section 163 of BNSS, formerly Section 144 CRPC) के तहत आयोजित किया गया था। पैलेट गन, जिन्हें अक्सर गैर-घातक माना जाता है, भारत में लगभग 2010 से भीड़ नियंत्रण के लिए तैनात की जाती रही हैं और ये अंधापन सहित गंभीर चोटें पहुंचा सकती हैं।