सत्यबोध चौधरी मौत मामला: जांच में लापरवाही पर रोहिणी कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को फटकारा

दिल्ली की एक रोहिणी कोर्ट ने 33 वर्षीय सत्यबोध चौधरी की मौत की जांच में गंभीर लापरवाही बरतने के मामले में दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) संयम जैन ने पुलिस की कार्यप्रणाली को "निंदनीय" बताते हुए कहा कि अदालत के निर्देशों की अनदेखी करना और सक्षम जांच न करना स्वीकार्य नहीं है। यह पूरा मामला उत्तर पश्चिम दिल्ली के बुद्ध विहार स्थित श्याम कॉलोनी का है, जहां 8 अगस्त 2026 को सत्यबोध चौधरी अपने किराए के घर में एक पानी के पाइप से लटके हुए मृत पाए गए थे।
इस मामले में मोड़ तब आया जब मृतक की बहन बबीता की ओर से वकील प्रवेश डबास ने 24 अगस्त को एक आवेदन दायर किया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में काफी देरी की और परिवार के मुख्य सदस्यों के बयान तक दर्ज नहीं किए गए, जिससे मामले में साजिश की आशंका गहरा गई।
जांच में खामियां और कोर्ट की सख्ती
अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 25 सितंबर को संबंधित सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) से जवाब मांगा था। कोर्ट जानना चाहता था कि क्या मृतक की पत्नी की हिरासत में पूछताछ जरूरी थी, उन्होंने जांच में कितना सहयोग किया और क्या घटना के दिन क्राइम सीन को सही तरीके से सुरक्षित किया गया था।
हैरानी की बात यह रही कि पुलिस ने घटना के 23 दिन बाद परिसर का दोबारा निरीक्षण किया, जिसके बाद एक संदिग्ध सुसाइड नोट और खून से सना झाड़ू बरामद होने की बात सामने आई। 17 अक्टूबर 2026 को दिए गए अपने फैसले में मजिस्ट्रेट संयम जैन ने जोर देकर कहा कि जब मामला किसी की जान जाने का हो, तो पुलिस को पीड़ित परिवार के साथ पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परिवार द्वारा दिए गए सबूतों का विश्लेषण पूरी सावधानी से किया जाना चाहिए और पुलिस द्वारा इन बुनियादी मानकों की अनदेखी करना गलत है।