रोहिणी कोर्ट के बाहर फायरिंग कर हत्या करने वाले दोषी की उम्रकैद बरकरार, दिल्ली हाई कोर्ट ने राहत देने से किया इनकार
दिल्ली हाई कोर्ट ने रोहिणी कोर्ट के बाहर फायरिंग कर हत्या करने वाले दोषी की उम्रकैद की सजा को निलंबित करने से इनकार कर दिया है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बेहद गंभीर मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए उस दोषी की उम्रकैद की सजा को निलंबित करने से मना कर दिया है, जिसने साल 2017 में रोहिणी कोर्ट के बाहर पुलिस हिरासत में मौजूद एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी थी। यह मामला उस समय का है जब आरोपी अपराध के वक्त 17 साल से अधिक उम्र का किशोर था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की खंडपीठ ने आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि अपराध कोर्ट परिसर के बाहर हुआ था और निशाना पुलिस हिरासत में मौजूद एक व्यक्ति था, इसलिए सजा को निलंबित नहीं किया जा सकता।
गैंगवार और आपराधिक इतिहास ने बढ़ाई मुश्किलें
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, यह हमला नीरज बावाना गैंग से जुड़े एक सदस्य ने किया था, जिसने प्रतिद्वंद्वी गैंग के सदस्य राजेश दूरमुथ की हत्या कर दी थी। उस समय राजेश को हरियाणा पुलिस कोर्ट में पेशी के लिए लेकर आई थी। सुनवाई के दौरान अपर पब्लिक प्रॉसिक्यूटर रितेश बाहरी ने कोर्ट को बताया कि दोषी केवल इस मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अन्य आपराधिक मामलों में भी नामजद है। यहां तक कि इस मामले में अंतरिम जमानत पर बाहर रहने के दौरान वह हरियाणा के झज्जर में एक अन्य मामले में पकड़ा गया था।
वहीं, आरोपी की ओर से वकील प्रवीण डबास ने दलील दी कि वह पिछले 7 साल और 9 महीने से जेल में है और जांच में कई खामियां रही हैं, जैसे कि फॉरेंसिक जांच के लिए नमूने नहीं भेजे गए। हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना और मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 के लिए तय की है।