पश्चिमी यूपी में रालोद-भाजपा गठबंधन पर टिकी निगाहें, टिकट विवाद नहीं बनेगा बाधा

यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद गठबंधन भाजपा को लगातार तीसरी बार जीत दिलाने में कितना कारगर रहेगा और इसे लेकर सभी की निगाहें टिकी हैं। राजनीतिक विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र सिंघल से बातचीत में रालोद संसदीय दल के अध्यक्ष केसी त्यागी ने स्पष्ट किया है कि टिकटों को लेकर कोई विवाद बाधा नहीं बनेगा।
रालोद का पिछला चुनावी प्रदर्शन और गठबंधन
रालोद ने पिछला विधानसभा चुनाव सपा गठबंधन के साथ लड़ा था जिसमें उसके 33 उम्मीदवारों में से आठ ने जीत दर्ज की थी और 15 दूसरे स्थान पर रहे थे। बाद में हुए उपचुनाव में उसने खतौली सीट जीतकर अपनी संख्या नौ कर ली थी। रालोद ने 2024 का लोकसभा चुनाव भाजपा के साथ मिलकर लड़ा, जिसमें बिजनौर से युवा उम्मीदवार चंदन चौहान और बागपत से डा. राजकुमार सांगवान चुनाव जीते। रालोद संसदीय दल के अध्यक्ष केसी त्यागी ने कहा कि पार्टी का नारा मजबूत आरएलडी-मजबूत एनडीए है और सीटों को लेकर कोई विवाद नहीं होगा।
सपा नेताओं के दावे और जाट मतदाताओं का रुख
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और विधान परिषद सदस्य राजेंद्र चौधरी का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों का रूझान महत्वपूर्ण रहेगा और भाजपा-आरएलडी गठबंधन को मुश्किल से 20-22 फीसद जाटों का ही समर्थन मिल पाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने डिंपल यादव के बजाए जयंत चौधरी को राज्यसभा में भेजा था और वह केंद्र में मंत्री बने हुए हैं। मुजफ्फरनगर से सपा सांसद हरेंद्र मलिक का भी मानना है कि जाटों का रूझान सपा की ओर है और भाजपा के साथ जाटों के संबंध सहज नहीं रहते हैं। सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि यदि जयंत चौधरी उनकी पार्टी के साथ आना चाहेंगे तो वह इसकी सिफारिश अपने अध्यक्ष से कर सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय और अन्य समीकरण
राजनीतिक चिंतक चौधरी प्रीतम सिंह ने कहा कि आज भाजपा की लोकप्रियता उतार पर है और नीट पेपर लीक, बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर छात्रों-युवाओं के आंदोलन का असर उपचुनावों में दिखा है। उन्होंने कहा कि केसी त्यागी के रालोद में शामिल होने से जयंत चौधरी को लाभ मिल सकता है क्योंकि वह पश्चिमी सीटों के समीकरणों को ठीक से समझते हैं। चौधरी प्रीतम सिंह का मानना है कि जिताऊ समीकरणों का ध्यान रखकर उम्मीदवार चयनित किए जाने से रालोद को फायदा हो सकता है। इसके अलावा पश्चिम में गुर्जर मतदाताओं का रूझान भी मायने रखता है, जहां बिजनौर सांसद गुर्जर किसान बिरादरी से आते हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की किसान समर्थक नीतियों के चलते जयंत चौधरी के नेतृत्व में रालोद शानदार प्रदर्शन करेगा।