रिटायर्ड जस्टिस एम एल वर्मा के साथ 3.2 करोड़ की धोखाधड़ी, बिल्डर पर FIR दर्ज

दिल्ली हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस एम एल वर्मा ने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के नाम पर करोड़ों की ठगी का मामला दर्ज कराया है। 84 वर्षीय पूर्व जस्टिस ने अपनी पत्नी नीता वर्मा और साले नवीन साहनी के साथ मिलकर एक आपराधिक शिकायत दर्ज की है, जिसमें 3,22,34,640 रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। इस शिकायत के बाद पिछले महीने हौज़ खास पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
यह पूरा मामला करीब 16 साल पुराना है। साल 2010 में एक विज्ञापन देखकर जस्टिस वर्मा ने नोएडा सेक्टर 15 में एक कमर्शियल प्रोजेक्ट में निवेश किया था। समझौते के मुताबिक, निर्माण कार्य सितंबर 2010 में शुरू होना था और मार्च 2014 तक प्रोजेक्ट पूरा हो जाना चाहिए था। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि डेढ़ दशक बीत जाने के बाद भी मौके पर एक ईंट तक नहीं लगाई गई।
बिल्डर ने लगाया निवेश के नाम पर जाल
शिकायत में 'एइम्स सान्या डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड' और उसके निदेशकों रूप किशोर मदन, संजय ठुकराल और कुछ अन्य अज्ञात लोगों को नामजद किया गया है। उन पर आपराधिक साजिश रचने और गलत इरादे से पैसे हड़पने का आरोप है। जस्टिस वर्मा ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, "तेरह, चौदह, पंद्रह साल बीत गए और वहां एक ईंट तक नहीं लगी। हमें पैसों से ठगा गया है। इससे ज्यादा बेईमानी और क्या होगी?"
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब अक्टूबर 2025 में बिल्डरों ने निवेशकों से बात करना पूरी तरह बंद कर दिया। जस्टिस वर्मा के बेटे और दिल्ली हाई कोर्ट के सीनियर एडवोकेट सात्विक वर्मा का आरोप है कि डेवलपर्स ने उन्हें धोखे में रखकर प्रॉपर्टी खरीदने के लिए प्रेरित किया, जबकि उनकी मंशा शुरू से ही प्रोजेक्ट बनाने की नहीं थी।