गुरुग्राम: रेपो रेट बढ़ने से निवेश और रोजगार पर संकट, पीएफटीआई ने जताई चिंता

Kittu Kumari21 October 20262 min read0 viewsNCR
गुरुग्राम: रेपो रेट बढ़ने से निवेश और रोजगार पर संकट, पीएफटीआई ने जताई चिंता

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के फैसले ने गुरुग्राम के औद्योगिक जगत, खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) की नींद उड़ा दी है। प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (PFTI) ने इस कदम पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि ब्याज दरों में यह वृद्धि छोटे उद्योगों के लिए निवेश और रोजगार के अवसरों को सीमित कर सकती है।

पीएफटीआई के चेयरमैन दीपक मैनी ने आगाह किया है कि जब बैंक कर्ज महंगा होता है, तो छोटी इंडस्ट्रीज के लिए अपना कारोबार चलाना और उसे आगे बढ़ाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्याज पर बढ़ने वाला अतिरिक्त खर्च सीधे तौर पर उद्योगों के मुनाफे को कम करेगा। इसका सबसे बुरा असर नई मशीनरी की खरीद, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए कर्मचारियों की भर्ती जैसी योजनाओं पर पड़ेगा, जिससे अंततः रोजगार के अवसर घट सकते हैं।

एमएसएमई सेक्टर के लिए राहत की मांग

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दीपक मैनी के अनुसार, महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाना जरूरी हो सकता है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा दबाव छोटी औद्योगिक इकाइयों पर पड़ता है। रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी उन सभी कर्जों को प्रभावित करेगी जिनकी ब्याज दरें इससे जुड़ी हैं, जिससे उद्योगों का मासिक खर्च बढ़ जाएगा।

छोटे उद्योगों के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक तरफ कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और अन्य परिचालन खर्चों का दबाव है, वहीं दूसरी ओर कैश क्रेडिट और वर्किंग कैपिटल पर बढ़ता ब्याज कारोबार के लिए उपलब्ध नकदी (Liquidity) को कम कर रहा है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पीएफटीआई ने सरकार और आरबीआई के सामने कुछ प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • एमएसएमई क्षेत्र के लिए दो प्रतिशत तक की ब्याज सब्सिडी लागू की जाए।
  • सिडबी (SIDBI) के माध्यम से बिना गारंटी वाले वर्किंग कैपिटल की सीमा में बढ़ोतरी की जाए।
  • एमसीएलआर आधारित कर्ज पर बढ़ी हुई ब्याज दरों के प्रभाव को संभालने के लिए 90 दिनों का संक्रमणकाल (Transition Period) दिया जाए।

चेयरमैन ने चेतावनी दी है कि यदि रेपो रेट 5.75 प्रतिशत के पार गया, तो छोटे उद्योगों की वित्तीय स्थिति और भी नाजुक हो सकती है, जिससे सेक्टर में अस्थिरता पैदा होने का खतरा है।

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