लाल किले ब्लास्ट केस: चार्ज फ्रेमिंग पर दलीलें सुनेगी NIA कोर्ट, आतंकी साजिश का होगा खुलासा

दिल्ली के लाल किले कार बम ब्लास्ट केस में NIA कोर्ट अब आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेमिंग पर दलीलें सुनेगा। जानिए क्या है पूरा मामला।

Kittu Kumari5 November 20262 min read0 viewsDelhi Local
लाल किले ब्लास्ट केस: चार्ज फ्रेमिंग पर दलीलें सुनेगी NIA कोर्ट, आतंकी साजिश का होगा खुलासा

दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास हुए भीषण कार बम धमाके के मामले में अब कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है। राउज एवेन्यू स्थित स्पेशल NIA कोर्ट ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेमिंग (आरोप तय करने) के लिए दलीलें सुनने का फैसला किया है। स्पेशल NIA जज प्रशांत शर्मा ने गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि शुक्रवार यानी 6 नवंबर से इस संबंध में दलीलें सुनी जाएंगी।

यह पूरा मामला नवंबर 2025 में हुए उस दर्दनाक धमाके से जुड़ा है, जिसमें एक हाई-इंटेंसिटी व्हीकल-बोर्न इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (VBIED) का इस्तेमाल किया गया था। इस हमले में 11 लोगों की जान चली गई थी और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे, साथ ही आसपास की संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा था। NIA ने इस साजिश के पीछे एक गहरी 'जिहादी साजिश' का दावा किया है।

आतंकी संगठन और 'ऑपरेशन हेवनली हिंद' का कनेक्शन

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NIA की जांच के मुताबिक, इस हमले में शामिल आरोपी 'अंसार गज़वात-उल-हिंद' (AGuH) से जुड़े थे, जो कि 'अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट' (AQIS) का ही एक हिस्सा है। जांच एजेंसी ने खुलासा किया है कि इन आरोपियों ने 2022 में श्रीनगर में एक गुप्त बैठक की थी, जहां उन्होंने 'AGuH इंटरिम' के रूप में संगठन को पुनर्गठित किया।

NIA ने अपनी चार्जशीट में बताया कि इन लोगों ने 'ऑपरेशन हेवनली हिंद' नाम से एक अभियान चलाया था। इस ऑपरेशन का मकसद लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ फेंकना और शरीयत शासन लागू करना था। इस साजिश में केवल अपराधी ही नहीं, बल्कि मेडिकल प्रोफेशनल्स जैसे पढ़े-लिखे लोग भी शामिल थे, जिन्हें कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित किया गया था।

जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि धमाके में 'ट्राईएसीटोन ट्राईपेरोक्साइड' (TATP) नामक विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था, जिसे कई प्रयोगों के बाद तैयार किया गया था। इसके अलावा, आरोपियों ने AK-47, क्रिंकोव राइफल्स और देसी पिस्तौल जैसे प्रतिबंधित हथियारों का अवैध संग्रह किया था और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए रॉकेट और ड्रोन-माउंटेड IEDs पर भी काम किया था।

इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि NIA ने करीब 7500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें 580 से अधिक गवाहों के बयान और 395 से ज्यादा दस्तावेज शामिल हैं। मुख्य साजिशकर्ता डॉ. उमेर उन नबी की धमाके में ही मौत हो गई थी, जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला चल रहा है। कोर्ट अब 6 से 27 नवंबर के बीच दलीलें सुनेगा, जिसमें 14 नवंबर को आरोपियों की ओर से बहस होगी।

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